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Lockdown Me Chudai – मकान मालकिन का अकेलापन दूर किया सेक्स चैट से 2

Lockdown Me Chudai

हेल्लो दोस्तों, मैं पुलकित आज आपको अपनी कहानी का दूसरा भाग सुनाने आया हूँ. दोस्तों आपने मेरे कहानी मकान मालकिन का अकेलापन दूर किया सेक्स चैट से 1 में पढ़ा की, कैसे मैंने अपनी मकान मालकिन के साथ फेक आईडी से सेक्स चैट किया. और उन्होंने मुझे गलती से अपने न्यूड्स पिक्स भेज दिए. अब आगे. Lockdown Me Chudai

रात को करीब 2 बजे आंटी ने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया और मुझे बाहर आने को बोला, मेरे से एक सिगरेट मांगी और पीने लगी। और बोली मोनिका: बेटा गलती से फोटोज मैंने तुझे भेज दी है, तूने देखी तो नही ना। बैसे तो आंटी मुझे नाम से बुलाती है पर आज बेटा कहा और बहुत परेशान भी लग रही थी, तो मैंने बात को संभाला।

मैं: वो तो मैंने देख ली, लेकिन आंटी आपको परेशान होने की जरूरत नही है, सेक्स चैटिंग में ऐसी फोटोज भेजना सामान्य बात है।

मोनिका: (थोड़ा सा हस्ते हुए) मैं किस्मत वाली हूँ जो मुझे तेरे जैसा समझदार दोस्त मिला है।

मैं: किस्मतवाला तो मैं हूँ आंटी, जिसके पास आप जैसी सेक्सी आंटी है। कसम से मैंने आज तक किसी औरत के ऐसे मोटे चुचे और इतनी चौड़ी गांड नही देखी। मैं आपकी सेक्स की भावनाओ को समझता हूँ और उसकी कदर करता हूँ।

मैंने पहले क्यों नही सोचा कि आपको भी सेक्स की जरूरत होगी। आंटी आप एक बॉयफ्रेंड बना लो जिसके साथ आप खूब मस्ती कर सको…। इतने सालों में आपने सेक्स नही किया मैं समझता हूँ, अगर आप चाहो तो मैं आपके लिए बॉयफ्रेंड बनवा सकता हूँ।

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मोनिका: (थोड़ा इमोशनल होते हुए) तू मेरे लिए इतना सोचता है और मेरा इतना ध्यान रखता है। तू मेरा इतना सोच रहा है तो मैं तुझे बता देती हूं मेरे पति के जाने के बाद ऐसा नही है कि मैंने सेक्स नही किया। इन 13 सालो में मैंने सेक्स का बहुत एन्जॉय किया है और मेरे काफी बॉयफ्रेंड रहे है।

मैं: ये अच्छा है कि आप अपनी सेक्स जिन्दगी जी रही है… अगर आप बुरा ना माने तो क्या आप बताओगे की आपके कितने बॉयफ्रेंड रहे है?

मोनिका: क्या तू अपनी आंटी के बारे में जानना चाहता है तो तुझे अपने बारे में भी बताना पड़ेगा।

मैं: ठीक है, आप जो पूछोगे बताउगा, पहले ये बताओ आपको कितने लड़को ने चोदा है?

मोनिका: तलाक होने के बाद 12 या 13 लड़को ने।

मैं: सच में? मैं:( आंटी की गांड पे हल्का सा थापड़ मरते हुए) आप तो बहुत नॉटी आंटी हो।

मोनिका: तूने कितनी लड़कियों को चोदा है?

मैं: 5 औरतो को, जिस में से 2 काफी बड़ी थी शायद 40 के आस पास।

मोनिका: तू भी कम खिलाड़ी नही है (आंटी ने मेरी गांड पे थापड़ मारते हुए बोला)।

मैं: आपको पोर्न फिल्मे देखने का शौक है?

मोनिका: पोर्न देखी हुई है लेकिन मुझे पोर्न से ज्यादा देसी कहानिया पसंद है, और तुझे क्या पसंद है?

मैं: मुझे भी कहानियां ज्यादा पसंद है।

मोनिका: क्या तू मुझे कुछ कहानिया भेज देगा?

मैं: अब हम दोस्त बन गए है तो इतना तो करना है पड़ेगा…। और क्या क्या किया है आपने?

मोनिका: बाकी बातें बाद में करेगे मुझे अब बहुत तेज नींद आ रही है।

फिर एक दूसरे को गुड नाईट बोलकर हम दोनों सोने चले गए। अब हमारी जिंदगी बिल्कुल बदल चुकी थी. हम इतना ज्यादा खुल गए थे कि हम अब एक दूसरे से कुछ भी बात कर लेते थे। अब मैंने ऐसे ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया जो आंटी कभी सोच भी नही सकते थे।

अगली सुबह उठकर जब मै बाहर आया तो देखा आंटी रसोई में थी और चाय बना रही थी। आंटी को मैंने ऊपर से नीचे तक निहारा और देखा कि आंटी के निप्पल टीशर्ट के ऊपर से टाइट दिख रहे थे, आंटी को मैंने पीछे से जाकर पकड़ा और अपने दोनों हाथो से उनके बूब्स सहला दिए।

मोनिका: ये क्या कर रहा है, आज ज्यादा प्यार आ रहा है आंटी पे?

मैं: आंटी पे तो हमेशा से आता है लेकिन ये प्यार अब आंटी और दोस्त दोनों पे आ रहा है।

मोनिका: दोस्त के लिए बॉयफ्रेंड बनवाने का वादा याद है ना?

मैं: आंटी लगता है चुदाई के मज़े लेने के लिए एक दम तैयार हो, इसीलिए निप्पल इतने टाइट हो रहे है।

मोनिका: (ये बात सुनकर आंटी का चेहरा थोड़ा लाल हो गया) ये क्या एक तरफ दोस्त बोलता है दूसरी तरफ आंटी अब दोस्त की तरह ही रह ना, अब आंटी नै मोनिका ही बोला कर, और ये निप्पल चुदाई के लिए नही सुबह की वजह से कड़क है जैसे तेरा औज़ार खड़ा हैं। (शायद जब मैंने आंटी को पीछे से हग किया था तो मेरा लण्ड आंटी की गांड पर दब गया तो उन्होंने महसूस किया)

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मैं: ओके मोनिका, अब ठीक है ना??

मोनिका: हाँ ये हुई ना दोस्त वाली बात..।

इतने में चाय बन गयी, फिर हमने चाय पी और अपने अपने काम में लग गए। आंटी ने घर का काम खत्म किया और मैं बाजार जाकर घर के लिए दूध, राशन ले आया। फिर हमने फ़िल्म देखी और ऐसे ही एक दूसरे को छेड़ते हुए दिन निकल गया। कई दिनों से चैटिंग करते हुए नींद पूरी नही हो रही थी उस रात हम जल्दी सो गये।

सुबह हम दोनों 6 बजे उठ गए, पहले एक साथ योगा किया फिर आंटी ने चाय बनाई और हमने चाय पी। अचानक से आंटी बोली…. मोनिका: लॉकडाउन की वजह से हम दोनों इतने अच्छे दोस्त बन गए है शायद ये कभी नही होता अगर लॉकडाउन नही होता, लेकिन घर में बैठे बैठे अजीब सा होने लगा है पता नही ये लॉकडाउन कब तक चलेगा।

मैं: इस समय तो बाहर जाना मुश्किल है क्योंकि लॉकडाउन अभी थोड़ा थोड़ा ही खुलना शुरू हुआ है. लेकिन अगर आपको बाहर चलना है तो कल सुबह जल्दी तैयार हो जाना हम मोटरसाईकल पे कहीं घूम आएंगे ।

मोनिका: लेकिन कहा जायेगे?

मैं: सरप्राइज है बस आप कल सुबह 5 बजे तैयार हो जाना, रात तक वापस आ जायेंगे। बस आप ऐसे कपड़े पहनना की बाइक पे आराम से बैठ सको।

उस रात भी हम जल्दी सो गए सुबह जल्दी उठना था ना, फिर अगले दिन सुबह सुबह तैयार होकर अपने कमरे से बाहर आये। मोनिका आंटी ने नील रंग की जीन्स और सफेद रंग की टीशर्ट पहनी थी, आंटी बला की खूबसूरत लग रही थी, एकदम सनी लियोन जैसी। “Lockdown Me Chudai”

मैं: मोनिका बहुत सुंदर लग रहे हो, काला टीका लगा लो कहीं नजर ना लग जाये।

मोनिका: (शर्म से लाल होकर) हम कहाँ चल रहे है?

मैं: आज हम जहा जा रहे है, ऐसी जगह शायद आपने कभी नही देखी होगी।

हम बाइक पर बैठ कर निकाल गए, करीब 4-5 घंटे के बाद एक छोटे से हिल स्टेशन पहुचे लैंसडौन। ये एक छोटा सा हिल स्टेशन है झा एक दो टूरिस्ट स्पॉट्स है एक तालाब है, एक टिप n टॉप पॉइंट जहां से जहां तक नजर जाए बस पहाड़ ही नजर आते है. मौसम बिलकुल ऐसा जैसे फिल्मो में दिखाते है ऊंचे-निचे रास्ते दोनों तरफ जंगल, रास्तो और जांगल में धुआँ धुआँ सा माहौल, बाकी सब तरफ हरियाली ही हरियाली थी। “Lockdown Me Chudai”

मोनिका: ये तु मुझे कहा ले आया?

मैं: कैसी लगी आपको ये जगह?

मोनिका: जगह तो बहुत अच्छी है।

मैं: आप बस जगह का आनंद लो।

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आंटी को देखकर ऐसे लग रहा था जैसे वो जन्नत में आ गयी है इतनी ख़ुश थी, और लग भी रहा था जैसे एक अप्सरा जन्नत में क्रीड़ा कर रही है। हमने वही एक छोटे से ढ़ाबे पर नास्ता किया। और फिर हम जंगल की तरफ हमने निकल गए। जब तक हम लौट कर आये शाम हो चुकी थी फिर हम थोड़ी देर तालाब में पैर डाल कर बैठ गए और आंटी उस जगह की तारीफ ही किये जा रही थी।

मोनिका: काश हम यह 2 -3 दिन के लिए रुक पाते।। पहले बताया होता कि ऐसी जगह है हम कपड़े लेकर आते और कुछ दिन रुकते यहां पर।

मैं: मैं खुश हूं आपको ये जगह पसंद आई, यह तो हम कभी भी आ सकते है। अब अंधेरा होने लगा है चलो चलते है।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही हम वहां से निकलने वाले थे तो अचानक मौसम खराब हो गया. पहाड़ी इलाके में ये आम बात है, जैसे तैसे हम उस ढाबे पर पहुंचे जहाँ नास्ता किया था.

पर वहाँ पहुंचकर तो नज़ारा देखने लायक था हम दोनों गीले हो चुके थे और मोनिका आंटी के उभार कपड़े फाड़ के बाहर आने को तैयार थे। सफेद टीशर्ट एक दम पारदर्शी हो गयी थी और साफ दिख रहा था आधे से ज्यादा चुचे ब्रा के बाहर थे। मैं तो आंटी को ही घूर रहा था कि अचानक आंटी ने बोला। “Lockdown Me Chudai”

मोनिका: अब क्या करेंगे?

मैं: अब तो हम दोनों ही गीले हो गए है और वापस जाना मुमकिन नही है, लगता है रात यही गुजारनी पड़ेगी।

मोनिका: लेकिन यहाँ कहा रुकेंगे और कपड़ो का क्या करगे?

मैं: रुको मै कुछ पता करता हूँ।

मैंने ढाबे वाले से पता किया आसपास कोई रुकने की जगह है क्या? उसने पास के एक होटल का पता बता दिया. फिर मै और आंटी उस होटल में पहुंचे, मैंने रिसेप्शन पर जाकर रूम के बारे में पता किया और जानबूझकर एक सिंगल रूम बुक कर लिया.

मैं: मोनिका एक सिंगल रूम ही मिला, कोई परेशानी तो नहीं होगी ना?

मोनिका: (थोड़ा परेशान) अरे कोई बात नहीं, पर अब जल्दी चलो रूम में यह सबलोग कैसे घूर रहे हैं?

 फिर हम रूम में आ गए, होटल तो वैसे ठीक सा ही था. बस एक परेशानी थी थोड़ा पुराना था तो रूम में अटैच बाथरूम नहीं था सबके लिये एक कॉमन बाथरूम बनाया हुआ था. रूम में आकर मैंने खाना टेबल पर रख दिया जो ढाबे से ही पैक करा लिया था होटल आते टाइम और एक व्हिस्की की बोतल भी आया था. क्योंकि बारिश की वजह से थोड़ी ठंड हो गयी थी। “Lockdown Me Chudai”

मोनिका: रुकने का तो हो गया पर अब कपड़ो का क्या करे?

मैं: कपड़े तो सूखने के लिए डालने है पड़ेगे।

मोनिका: पर कैसे?? (परेशान होकर) हमारे पास तो और कपड़े भी नही है।

मैं: मोनिका कुछ समय के लिए तो नंगा है रहना पड़ेगा, यहां अटैच बाथरूम भी नही हैं।

मोनिका: लेकिन तेरे सामने कैसे?

मैं: (आंटी को थोड़ा सा छेड़ते हुए) नंगा तो मैं आपको देख चुका हूं, पहले ही, आज साक्षात दर्शन हो जायेगे (आंटी झेंप गयी और मुझे आंखें दिखाने लगी और एक मुक्का हल्के से मेरे सीने पर मार दिया)।

मोनिका: पहले तू उतार के सुखा दे, फिर मैं सुखा दूँगी।

मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और रूम लगे हैंगर पर तांग दिए। अब मैं आंटी के सामने नंगा था, थोड़ी शर्म भी आ रही थी. अपने हाथ से अपने लण्ड को छुपाने की कोशिश कर रहा था. मैंने नोटिस किया आंटी भी चोरी चोरी मेरे लण्ड को देख रही थी।

मैं: अब आप भी उतार कर सुखा लो नहीं तो ठण्ड लग जाएगी, मैं खाना लगाता हूँ।

मैंने देखा आंटी थोड़ा सोच रही थी अभी भी तो मैंने आंटी थोड़ा छेड़ते हुए बोला।

मैं: मोनिका तुम निकाल लोगी या तुम्हारे भी मै ही निकाल कर सुखा दु??

मोनिका: ठीक है पर कुछ हरकत मत करना।

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ये सुनकर मै आंटी के पास गया और धीरे धीरे आंटी के एक एक कपड़े निकालने लगा। पहले टीशर्ट निकली तो 2 बड़े बड़े तरबूज मेरे सामने थे। मैं: जब ये चुचो को संभाल है नही पाते तो पहनते ही क्यों हो?( आंटी बस हँस दी) मैंने जल्दी से ब्रा खोल कर दोनों चुचो को आज़ाद कर दिया।

मेरी उम्मीद से ज्यादा बड़े थे चुचे, मैंने छूने की कोशिश की लेकिन आंटी ने हाथ रोक दिया। फिर मैं आंटी की जीन्स उतारने के लिए बढ़ा, बटन और चैन चोल कर एक झटके में जीन्स उतार दी, आंटी की चूत की खुशबू पैंटी से होती हुई मेरे जिस्म में जा रही थी और मेरे अंदर का हैवान जाग रहा था। “Lockdown Me Chudai”

मैंने एक उंगली पैंटी मैं डाली और नीचे की तरफ खीचना चालू किया उसी बीच अपनी उंगली को चूत पर रगड़ दिया और एक जोरदार सीसीसीसीसीसीसीसी………सीसीसीसीस की आवाज़ आयी। अब आंटी जो कि अब एक सेक्स की देवी का रूप ले चुकी थी मेरे सामने नग्न अवस्था में खड़ी थी।

मैं आंटी की चूत को घूर रहा था कि अचानक ही मेरे अंदर से फूंक निकली जो कि चुत से जा टकराई और मोनिका ने अपने होठ अपने दांत में दबा लिए। मुझे पता लग गया था आंटी आज घोड़ी बनने के लिए तैयार है लेकिन तरसाने के बाद चुदाई का जो मज़ा है वो किसी और चीज में कहा।

इसके बाद मैंने खाना लगाया और साथ में ही व्हिस्की के दो पैग भी बना लिए। हम दोनों ने पैग बड़े आराम से खत्म किया, थोड़ा खाना खाया फिर दूसरा पैग बना लिया. दो पैग खत्म करने के बाद आंटी पर थोड़ा सुरूर चढ़ने लगा, फिर मैंने आंटी को कहा चलो डांस करते हैं. आंटी भी राजी हो गयी, आंटी पे हल्का नशा चढ़ गया था। “Lockdown Me Chudai”

हम कपल डांस करने लगे, आंटी मुझे पकड़े हुए थी और हम एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे। कि अचानक मैंने अपने दोनों हाथों से आंटी की गांड को दबोच लिया, एक झटका लगा और वो मेरे और करीब आ गयी। जैसे जैसे मैं गांड से खेल रहा था आंटी के अरमान बाहर आ रहे थे और आंटी ने आंखे बंद कर ली और आंटी ने अपने होठ मेरे होठो में घुसा दिए. “Lockdown Me Chudai”

और हम एक दूसरे को ऐसे चुम रहे थे कि ये शाम फिर नही आएगी। चूमते हुए मैंने आंटी को उल्टा किया अब मेरा लण्ड आंटी की गांड को टच कर रहा था. और उसकी गांड मे घुसने को तैयार था और आंटी की तरफ से कोई विरोध नही हो रहा था। मैंने आंटी के दोनों चुचे अपने हाथों की गिरफ्त में ले लिए और उन्हें मसलने लगा।

आंटी भी पूरा मज़ा ले रही थी और हल्की हल्की आवाज़ आ रही थी मममममममम आआआ… मममममममम आआआआआआ। मैं धीरे धीरे अपना हाथ आंटी के जिस्म पर घुमा रहा था और अपना एक हाथ आंटी की मोटी फुली हुई चुत पे रखा। और आंटी के मुंह से आनंदमयी आवाज़ निकली आह आह आह आह………आह आह आह, और आवाज़ धीरे धीरे तेज़ हो रही थी।

मैं आंटी की चुचे, चुत और गांड के साथ एक साथ खेल रहा था, आंटी इस लम्हे का भरपूर मज़ा लूट रही थी। आंटी ने धीरे से हाथ पीछे की तरफ घुमा कर मेरे लण्ड को पकड़ लिया जो कि एक जहरीले साँप की तरह फनफना रहा था। जैसे जैसे नशा बढ़ रहा था हमारी मस्ती परवान चढ़ रही थी।

मैंने आंटी को अपनी बाहों में उठाया और बेड पर लिटा दिया और हम एक दूसरे को पागलो की तरह चूमने लगे। आंटी के एक चुचे को मुँह में लेकर चूस रहा था और दूसरे चुचे को हाथ से मसल रहा था। दोनों चुचो को अच्छे से चूसने के बाद में धीरे धीरे नीचे की और बढ़ा, और अपना मुंह आंटी की मादक चुत पे टिका दिया, और अभी जीभ से चुत को चाटने लगा। “Lockdown Me Chudai”

बीच बीच में चुत के दाने को अपनी जीभ से छेड़ देता तो आंटी एक दम उछल जाती, आंटी ने मेरे बालो को पकड़ रखा था और अपने पैरों से मुझे जकड़ा हुआ था। जैसे ही मेरा सिर आंटी की चूत से हटता जो जोर से अपनी चुत पे वापिस लगा देती, आंटी की आवाज़, चुत की खुशबू माहौल को और सेक्सी बना रही थी।

फिर आंटी ने मुझे नीचे लिटा लिया और मेरी जांघो पे चूमने लगी, आंटी को लण्ड के करीब आते देख पूरे शरीर में आग लग रही थी। अचानक आंटी ने लण्ड को मुँह ले लिया और चुस्न क्रिया चालू की, जिस तरह से वो अपनी जीभ को लण्ड के सुपाटे पे घुमा रही थी।

उससे पता लग रहा था बहुत खेली हुई औरत है, आंटी के लण्ड के चूसने से ऐसा लग रहा था जैसे लण्ड में तूफान सा आ गया है। उधर आंटी जोर जोर से लण्ड को चूस रही थी और इधर मेरा बुरा हाल था। आंटी मेरी आँखों में देख कर मुस्कुरा रही थी.

तभी मैंने उसको कुतिया बनने को कहा, मेरी बात सुन कर वो तुरंत टांग खोलकर कुतिया बन गयी और बोली… मोनिका: अब बर्दास्त नही होता जल्दी से अपने लण्ड को डाल अन्दर। मैंने बिना समय गवाए अपने लण्ड को मेरी कुतिया के चुत पर रख दिया।

चुत एकदम गीली थी तो एक ही झटके में अंदर चला गया और आंटी के मुँह से एक जोरदार आवाज़ आयी आआआआआआआआ हहहहहहहह। और जैसे जैसे झटको की रफ्तार बढ़ती गयी आंटी के शब्दों का रूपांतरण होता गया…।। “Lockdown Me Chudai”

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मोनिका: चोद अपनी इस कुतिया को, फाड़ दे चुत अपनी आंटी की, बना ले मुझे अपनी रंडी… आंटी के मुँह से ऐसे शब्द सुन कर मुझे और जोश आ गया और झटको की रफ्तार और तेज़ होती गयी। मानो ऐसा लग रहा था जैसे चुत और लण्ड में तूफान आ गया था, पूरे माहौल में फच फच फच…… फच फच की आवाज़ें गूंज रही थी और फिर अचानक आंटी का शरीर ढिला होने लगा।

और मेरे लण्ड से पिचकारी निकली और सारा माल आंटी की चूत में गिरा दिया और हम एक दूसरे के बाजू में निढाल होकर लेट गए। मैं: कैसा लगा मोनिका? मोनिका: बहुत मज़ा आया, ऐसा लगा आज तू मेरी चुत फाड़ देगा।

मैं: मेरी रंडी मोनिका, अब तो ऐसी चुदाई रोज़ होगी और हम नई नई चीजें करेगे और फिर हमने एक दूसरे को चूमा। मोनिका: क्या हम यहाँ 1-2 दिन और बीता सकते है? क्या हम वहाँ रुकें?वापस आकर हमने क्या क्या किया? इसके आगे की कहानी दूसरी कहानी में लिखूंगा, ये कहानी कैसी लगी बताने के लिए मेल कर सकते हैं अपने सुझाव जरूर दे: [email protected]

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