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Bahan Lund Fetne Lagi – अपनी रसीली चूचियां पिलाया भैया को

Bahan Lund Fetne Lagi

ये कुछ दिन पहले ही बात है। मैं उस दिन कॉलेज से देर से आई थी। देर के हो जाने के कारण मेरा भाई प्रीतम बहुत नाराज था। “कोमल! कहाँ थी तुम?? देर कैसे हो गयी??” उसने चिल्लाकर पूछा “मैं अपनी दोस्त के घर गयी थी पार्टी में” मैंने कहा तो प्रीतम बहुत गुस्सा हो गया और मुझे मारने लगा। तो मैंने भी उसे हाथ से मारने लगी। Bahan Lund Fetne Lagi

हम दोनों भाई बहन जुडवा थे इसलिए हम दोनों बराबर थे और बहुत झगड़ा करते थे। फिर झगड़ा करते करते प्रीतम का हाथ मेरे मम्मे में लग गया तो मुझे बहुत मजा आया। फिर वो भी अपने कमरे में चला गया। शायद उसे कुछ पछतावा हो रहा था। अब धीरे धीरे मेरा अपने भाई से चुदवाने का मन करने लगा था।

मुझे इस बात पर हैरानी भी होती थी की मैं कैसी बहन हूँ की अपने सगे भाई से चुदवाने के बारे में सोच रही हूँ। फिर कई दिन मैंने रात में सोते वक्त अपनी चूत में ऊँगली करके अपनी चूत की आग शांत कर ली। धीरे धीरे मैं रोज अपने भाई के सामने छोटे कपड़े पहनने लग गयी।

अब मैं घर में शॉर्ट्स पहनने लगी तो जांघ तक होते थे। और मैं उपर सिर्फ एक पतली ही कंधे खुले वाले टी शर्ट पहनती थी। धीरे धीरे मेरा अपने भाई से चुदवाने का दिल कर रहा था। कुछ दिनों बाद मेरे पापा और मम्मी एक शादी में शहर से बाहर चले गये थे। मेरे और भाई प्रीतम के एग्जाम हो रहे थे। इसलिए हम लोगो को घर ही ही रुकना पड़ा।

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इसी बीच मैंने पूरा प्लान बना लिया। मैंने बहुत ही छोटे कपड़े पहने और सीढियों से फिसलने का नाटक किया और तेज तेज मैं रोने लगी। मेरा भाई प्रीतम मुझसे झगड़ा बहुत करता था पर प्यार भी बहुत करता था। वो तुरंत दौड़ता दौड़ता आया।

“क्या बहन बहन?” प्रीतम ने पूछा.

“भाई देखो ना मेरा पैर फिसल गया है और कमर और पीठ में बहुत दर्द हो रहा है” मैंने कहा.

तो प्रीतम ने मुझे बाहों में उठा लिया और बेडरूम में ले गया। उसने मेरा टॉप निकल दिया और मुझे पेट के बल बेड पर लिटा दिया। फिर वो मेरे मूव लगाने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। धीरे धीरे मेरी चूत गीली हुई जा रही थी। मैंने सिर्फ ब्रा बहन रखी थी। मैं अंदर ही अंदर चाहती थी की आज मेरा भाई मुझे कसके चोदे और मेरी चूत फाड़कर रख दे।

“भाई! तुम मेरी ब्रा की डोरी खोल दो और पूरी पीठ में मूव अच्छे से लगा दो” मैंने कहा।

प्रीतम ने मेरी ब्रा की डोरी पीछे से खोल दी। मेरी पीठ अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी। फिर प्रीतम अपने हाथ से मेरी पीठ पर मूव लगाने लगा। मुझे अच्छा लग रहा था। पर मेरा असली मकसद अपने भाई का मोटा लंड खाना था और कसके चुदवाना था। हम दोनों 21 साल के हो चुके थे।

“ओह्ह्ह! मेरे पेट में भी दर्द हो रहा है!” मैंने कहा.

तो प्रीतम ने मुझे पलट लिया। मेरी ब्रा तो पहले से ही खुली हुई थी इसलिए वो अपने आप हट गयी और मेरे 34” के शानदार मम्मे उसे दिख गये। मेरा भाई कोई कैरक्टरलेस आदमी नही था। वो एक अच्छा लड़का था। इसलिए वो दूसरी तरफ देखने लगा। मैंने अपने भाई का हाथ पकड़ लिया।

“कोई बात नही भाई!! मुझसे कैसी शर्म! आओ मेरे पेट पर मूव लगाओ!!” मैंने कहा।

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फिर प्रीतम मेरे पेट पर मूव मलने लगा। मेरे खूबसूरत 34” के मम्मो को वो देखे ही जा रहा था। मेरे दूध बहुत ही सेक्सी थे। फिर धीरे धीरे प्रीतम के हाथ मेरे मम्मो पर जाने लगे और वो मूव मम्मो पर भी मलने लगा। मुझे ठंडा ठंडा लग रहा था। उसके बाद मैंने प्रीतम का दूसरा हाथ भी अपने दूसरे मम्मे पर रख दिया।

धीरे धीरे वो खुद ही समझ गया और हम दोनों किस करने लगे। हम दोनों भाई बहन में चुदाई का समझौता हो गया था। प्रीतम मेरे उपर लेट गया था और मेरे होठ चूस रहा था। मुझे बहुत सेक्सी महसूस हो रहा था। मेरे दोनों होठों में सनसनाहट हो रही थी। क्यूंकि आज पहली बार मैं किसी जवान मर्द के होठ चूस रही थी।

हम दोनों लिप लॉक होकर किस कर रहे थे। मेरे होठो को भाई संतरे की फांकों की तरह चूस रहा था। मेरी चूत में खुजली शुरू हो गयी थी। मैं अपने भाई से चुदना चाहती थी। धीरे धीरे प्रीतम सब कुछ समझ गया और मेरे मम्मो को सहलाने लगा। फिर तेज तेज दबाने लगा।

जब जब वो मेरे बूब्स पर हाथ घुमाता था मुझे बहुत सेक्सी फील होता था। आज मेरे अंदर की औरत कसके चुदना चाहती थी। मैं चाहती थी की भाई आज मुझे चोद चोदकर एक औरत बना दे। आज मैं अपनी चूत फड़वाने के मूड में थी। फिर भाई तेज तेज मेरे बूब्स को दबाने लगा। मुझे नशा सा हो रहा था।

मैं “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की आवाज निकाल रही थी। धीरे धीरे भाई और तेज तेज मेरे बूब्स दबाने लगा। मुझे अजीब सा नशा चढ़ रहा था। फिर प्रीतम मेरे बूब्स चूसने लगा। उसे भी बहुत मजा मिल रहा था।

मैं भी उसे अपनी रसीली चूचियां पिला रही थी। मेरे अंदर आग सी जल चुकी थी। दोस्तों मेरे बूब्स तो बहुत ही खूबसूरत थे। बड़े बड़े, रसीले और अनार जैसे। अगर कोई लड़का एक बार मुझे नंगी देख लेता तो मेरी चूत और गांड दोनों कसके चोद लेता। दोस्तों मैं कितनी खूबसूरत लड़की थी।

धीरे धीरे प्रीतम मुझसे प्यार करने लगा था। उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था। वो मेरे बूब्स को मजे से चूस रहा था। बिना देर किये प्रीतम ने मेरे मम्मे को हाथ में ले लिया और उसका साइज पता करने लगा। मेरे दूध बहुत सुंदर थे, छातियाँ भरी हुई, सुडौल और गोल गोल थी, जैसे उपर वाले ने कितनी फुर्सत से बैठकर मेरी जैसी माल और मस्त चोदने लायक लड़की बनाई थी।

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मेरी उजली छातियाँ पूरे गर्व से तनी हुई थी। छातियों के शिखर पर अनार जैसे लाल लाल बड़े बड़े घेरे मेरी निपल्स के चारो ओर बने थे, जिसमे मैं बहुत सेक्सी माल लग रही थी। प्रीतम की नजर मुझ पर जम गयी। तेजी से उसने मेरी रसीली बलखाती चुचियों को अपने वश में कर लिया और दोनों मम्मो को दोनों हाथ से दबोच लिया और तेज तेज दबाने और मसलने लगा।

““उ उ उ उ उ।।।।।।अअअअअ आआआआ।।। सी सी सी सी।।।।” मैं तेज तेज चिल्लाने लगी। मेरा भाई मेरे दूध को किसी हॉर्न की तरह दबाने लगा। मुझे भी काफी मजा आ रहा था। फिर वो लेटकर मेरे दूध मुंह में लेकर पीने लगा। मैं तडप गयी। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी थी।

‘बहन!!।। तुम इतनी कड़क माल हो की जो मर्द आपको एक बार देख ले उसका लौड़ा तुरंत खड़ा हो जाएगा और वो तुमको चोदकर ही मानेगा’ प्रीतम बोला। “Bahan Lund Fetne Lagi”

मुझे उसकी बात अच्छी लगी। वो फिर से मुझ पर लेट गया और हपर हपर करके लपर लपर करके मेरी नुकीली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पीने लगा। वो तो बहुत शरारती निकला। वो मेरी नुकीली छातियों को दांत से काट रहा था और पी रहा था।

मुझे दर्द भी हो रहा था, उतेज्जना भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था। ‘भाई!….प्लीस आराम से मेरे नारियल चूसो!! आराम से चूसो!!’ मैंने कहा। पर उस पर कोई असर नही पड़ा। वो अपनी धुन में था। जोर जोर से मेरी सफ़ेद कदली समान चूचियाँ दांत से जोर जोर से काट कर पी रहे था।

वो बहुत जादा चुदासा हो गया था। उसका बस चलता तो मेरी छातियाँ खा ही लेता। मेरी रसीली छातियों को वो जोर जोर से दबा रहा था और निपल्स पर अपनी जीभ फेरते थे और पी रहा था। दोस्तों, बड़ी देर तक यही खेल चलता रहा।

“भाई! अब मुझसे कंट्रोल नही हो रहा है। सी सी सी सी…. प्लीस जल्दी से मेरी चुद्दी [चूत] में लंड डाल दो और जल्दी से चोदो!!” मैंने किसी बेशर्म लड़की की तरह कह दिया। प्रीतम अब मेरी दोनों चूचियों को अच्छे से चूस चुका था। अब वो मुझे चोदने जा रहा था।

प्रीतम ने मेरे हाथ में अपना लंड दे दिया। हाय दादा!! कितना बड़ा लौड़ा था उसका। 10” लम्बा और 2” मोटा था। मैंने हाथ में लिया तो मैं डर गयी थी। मुझे डर लग रहा था की इतना बड़ा लंड मेरी चूत में कैसे अंदर जाएगा। फिर मैं जल्दी जल्दी उसका लंड फेटने लगी। कुछ ही देर में प्रीतम का लंड खड़ा हो गया था।

वो देखने में बहुत ही सेक्सी लंड लग रहा था। जैसे किसी गधे का लंड हो। मैं जल्दी जल्दी उसे उपर नीचे करके फेटने लगी। प्रीतम को भी बहुत मजा आ रहा था। वो आह आह की आवाज निकाल रहा था। मैं और जल्दी जल्दी उसका लंड फेटने लगी। फिर मुंह में लेकर मैं चूसने लगी। बार बार मेरे बाल नीचे गिर जाते थे। “Bahan Lund Fetne Lagi”

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बार बार मुझे बालों को उपर कान के पीछे ले जाना पड़ता था। मेरे भाई का लंड तो बहुत ही रसीला था। मैं मुंह में लेकर जल्दी जल्दी चूसने लगी। प्रीतम मेरी चूत और सहलाने लगा। धीरे धीरे मैं गर्म हुई जा रही थी। फिर मैंने उसके लंड को गले में अंदर तक भर लिया। बड़ी देर तक मैंने लंड बाहर ही नही निकाला।

फिर कुछ मिनट बाद मैंने उसका लंड बाहर निकाला। उसे मेरा ये कारनामा बड़ा अच्छा लगा। फिर मैंने जल्दी जल्दी मेहनत से अपने भाई का लंड चूसने लग गयी। अब उसका लंड और जादा फूलकर बड़ा हो गया था। मैं डर रही थी की कहीं भाई का लंड मेरी चूत ना फाड़ दे। प्रीतम ने मुझे सीधा लिटा दिया और मेरी चूत पीने लगा।

दोस्तों मैंने चाहती थी की आज वो मुझे कसके चोदे और भरपूर मजा दे। इसलिए आज सुबह ही मैंने अपनी चूत की झांटो को हेयर रिमूवर क्रीम से साफ़ कर दिया था और नहाते वक़्त अच्छे से साबुन से मलकर चमका दिया था। मेरे भाई तो मेरी चूत बहुत ही सेक्सी और हॉट लगी।

वो जल्दी जल्दी किसी चुदासे कुत्ते की तरह मेरी बुर चाटने लगा। उसे भी मजा मिल रहा था। वो मेरे चूत के दाने को जल्दी जल्दी चाट रहा था। मुझे बहुत सनसनी फील हो रही थी। मैंने जल्दी जल्दी अपने भाई के सिर के बालों में अपने हाथ घुमाने लगी और उसके चेहरे को सहलाने लगी।

वो और जल्दी जल्दी मेरी चूत चाटने लगा। मेरी चुद्दी का स्वाद नमकीन था जो प्रीतम को बहुत पसंद आ रहा था। फिर वो मेरी चूत के लम्बे लम्बे होठो को दांत से पकड़कर उपर की तरफ खींचने लगा। दोस्तों मुझे इतना उत्तेजना हुई की लगा कहीं मेरा माल ना चूत जाए।

अनगिनत बार भाई ने मेरे चूत के लम्बे लम्बे होठो को दांत से पकड़कर उपर उपर को उठाया। ““……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….प्रीतम प्लीस मुझे जल्दी चोदो। अब मुझसे नही रहा जा रहा है!!” मैंने कहा पर उसने मेरी बात नही सुनी और जल्दी जल्दी वो मेरी चूत को खाता रहा। “Bahan Lund Fetne Lagi”

फिर उसने कस कसके कई चांटे मेरी चूत पर मार दिए। मुझे बहुत सनसनी हो रही थी। अब मैं चुदने को पूरी तरह से तैयार थी और मेरी चूत से सफ़ेद रंग का माल निकलने लगा था। प्रीतम ने मेरे पैर खोल दिए और लंड चूत में डाल दिया और मुझे चोदने लगा। मैं मजे से आह आह हा हा करके चुदवाने लगी।

प्रीतम के मोटे लौड़े से मेरी चूत सिकुड़ गयी थी। बड़ी कसी कसी नशीली रगड़ थी वो। चुदते चुदते मेरे पेट में मरोड़ उठने लगी। इसके साथ ही मेरे बदन में बड़ी अजीब सुखद लहरें उठने लगी, जो मेरी चुदती चूत से उठ रही थी और पूरे बदन में फ़ैल रही थी। मैं फटर फटर करके चुदवा रही थी।

प्रीतम को कुछ समझाने की जरुरत नही थी। वो सब जानते था। किसी तेज तर्रार लडके की तरह वो मेरे साथ संभोग कर रहे था। कुछ देर बाद मेरा भाई बहुत जादा चुदासा हो गया और बिना रुके किसी मशीन की तरह मेरी चूत मारने लगा। फटर फटर करके उसकी कमर मेरी कमर से टकरा रही थी।

चट चट की आवाज कमरे में बज रही थी। प्रीतम मेरी छातियों को जोर जोर से मीन्जने, दबाने और मसलने लगा। मेरी चूत गीली हो गयी। प्रीतम का लौड़ा सट सट करके मेरी चूत ले रहा था। वहीँ मेरे पेट में मरोड़ उठ रही थी। इसके साथ ही आनंद की सुखद लहरे चूत से लगातार उठ रही थी।

इस गजब की उतेजना के दौर में प्रीतम ने चट चट मेरे गाल पर २ ४ थप्पड़ भी जड़ दिए। मैंने हाथ के पंजों से बिस्तर की चादर पकड़ ली और कसकर भींच ली क्यूंकि मेरी चुद्दी [चूत] में अब तूफान आ चुका रहा। वो हौक हौंक के मेरी चूत मारने लगा। इस तरह चुदवाने में कुछ आराम मिल रहा था। “Bahan Lund Fetne Lagi”

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खाली मुट्ठी चुदवाने में बड़ा अजीब लगता है। हाथ में तो कुछ होना ही चाहिए। प्रीतम फक फक करके मुझे फक [चोद] कर रहे थे। मैं अच्छी तरह जानती थी की वो मेरे रूप, रंग और खूबसूरती को भोगना चाहते है। वो मुझे पेट पर हाथ से गोल गोल सहला सहलाकर चोद रहे थे।

कुछ देर बाद मेरी चूत रवां हो गयी और पूरी तरह से खुल गयी। उसका रास्ता खुल गया। मेरी चूत से ढेर सारा ताजा मक्खन निकला रहा था, चुदते समय जो भाई के मोटे लौड़े पर ग्रीस की तरह अच्छे से चुपड़ गया था। इससे वो अच्छे से फट फट करके मुझे चोद पा रहे थे।

मैं “आई…..आई….आई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” की आवाज निकाल रही थी। किसी पिस्टन की तरह उनका लौड़ा मेरी चूत में फिसल रहा था, अंदर बाहर हो रहा था और मेरी चूत को चोद रहा था। मेरा भाई कामशास्त्र और चोदनशास्त्र में भी प्रवीण था, माहिर थे। ये बात आज मुझको पता चल गयी थी।

फिर मेरा भाई प्रीतम मुझे लेटकर पेलने लगा। अब वो मेरे होठ भी चूस रहा था और नीचे से मुझे चोद भी रहा था। मैं तो किसी सातवे आसमान में विचरण कर रही थी। क्यूंकि भाई ने मुझे चोद चोदकर मेरे सारे नट बोल्ट ढीले कर दिए थे। फिर आधे घंटे बाद उसने मेरी चूत में ही माल गिरा दिया। अब मैं भाई से पूरी तरह से सेट हो चुकी हूँ और जब मन करता है चुदवा लेती हूँ।

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