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मेरी श्रीमती का लाजवाब बदन

मेरा नाम राजीव है. मैं एक अजीब सी फंतासी से ग्रसित हूँ. चूंकि मैं अर्न्तवासना का नियमित पाठक हूँ. इसलिए मेरी कुछ इच्छाएं इस पर ही पूर्ण हो जाती हैं. इधर मुझे ग्रुप सेक्स की स्टोरी पढ़ना बहुत पसन्द हैं. मुझे यह अच्छा लगता है कि कोई लड़की खुद की इच्छा से ग्रुप सेक्स ज्वाइन करे.

मेरी पत्नी एक रिजर्व स्वभाव की महिला है. वो सेक्स व प्यार-व्यार में कोई विश्वास नहीं रखती. वो विवाह को केवल एक सामाजिक संस्था मानती है. जिसके कारण मैं बहुत अपसैट रहता हूँ. इस बोरियत को दूर करने के लिए मैं उसके साथ एक रिसॉर्ट पर घूमने गया. वह पहले तो बहुत ही नाराज हुई कि मुझे नहीं जाना ऐसी वैसी जगह.. क्योंकि इन जगहों पर कोई अच्छे काम नहीं होते हैं.

मेरे बहुत कहने पर और समझाने पर वह इस बात पर मान गयी कि हम पति पत्नी ही जा रहे हैं. मैं किसी और को नहीं ले जा रहा. बस अपनी पत्नी के साथ जा रहा हूँ.

फिर मैंने उसे अर्न्तवासना की कुछ कहानियों के उदाहरण दिए, जिससे मैं उसे कई बार सच्ची कहानियां बता कर बताता आया हूँ. कुछ ऐसी लड़कियों के उदाहरण दिए, जो अकेले में टाईम पास के लिए किसी को भी स्वीकार कर लेती हैं. वह कोई उनसे कोई रिश्ता थोड़े ही बनाती हैं.

काफी कुछ कहने के बार वह मानी और जाने को राजी हुई. लेकिन उसने कहा कि मैं उसके साथ किसी भी चीज की कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा.. नहीं तो मैं किसी भी लड़की को अपने साथ ले जाऊं, उसे कोई आपत्ति नहीं है.
लेकिन मैंने उससे कहा- मैं सिर्फ तुम्हारे साथ आनन्द लेना चाहता हूँ, किसी और के साथ नहीं.
चूंकि मैं एक सामान्य मिडल क्लास आदमी हूँ. इसलिए में ऐसा सोच भी नहीं सकता.

खैर मैं जैसे तैसे उसे एक रेसॉर्ट पर ले गया. मैंने एक लग्जरी कमरा पहले ही बुक करवा रखा था. उस रेसॉर्ट में प्राईवेट पूल था. रेसॉर्ट शहर से दूर पहाड़ों के बीच था. वहां इतनी शांति थी, जिसकी कोई हद नहीं. हमने जैसे ही रेसॉर्ट में कदम रखा.. तो वह एक बार तो चहकी कि मजा आ गया. लेकिन उसे सुनसान जगह से डर लगता है. उसको थोड़ा इग्नोर करके मैंने मैनेजर से रेसॉर्ट की प्रोपर्टी दिखाने को बोला. करीब 5 एकड़ में फैला रेसॉर्ट सब तरफ ऊँची दीवारों से सुरक्षित देख कर उसको थोड़ा सन्तोष हुआ.

उसका सन्तोष बढ़ाने के लिए मैनेजर ने कहा- यहाँ आपकी प्राईवेसी में कोई दखल नहीं होगा. आप मन चाहे जैसे रह सकते हैं.

इसके बाद हम दोनों रूम में पहुँचे तो वह बोली- ये जगह तो स्वर्ग की तरह है.. सारा रेसॉर्ट बिल्कुल सफेद.. रूम भी सफेद.. मजा आ गया.

ये सब देखकर उसका मन प्रसन्न हो गया. किंगसाईज बेड जिस पर बिस्तर करीब 3 फिट मोटा स्प्रिंग वाला था. मैंने सबसे पहले तो उसे उठाकर बेड पर पटका और धीरे धीरे उसके बदन को सहलाने लगा. जिससे उसने अपनी आंखें बन्द कर लीं.

मैंने उससे कहा कि आज आंखें बन्द नहीं करनी हैं. बल्कि सब कुछ करने में मेरा साथ देना है. तब ही कोई मजा आएगा. नहीं तो यहां आने का कोई फायदा हीं नहीं.
कुछ ना नुकुर के बाद वह राजी हो गई. वह बोली- आज जो आपकी इच्छा है, वह कर लो.. मैं नहीं रोकूंगी.

मैंने कहा- सेक्स तो घर ही करते हैं … पर यहां कुछ मजा करते हैं.
वो बोली- कैसे?
मैंने कहा- केवल यह कह दो कि घर चलने तक तुम किसी चीज की मना नहीं करोगी.
वो बोली- मैं ऐसा कोई काम नहीं करूँगी, जो मेरे मन को पसन्द नहीं हो.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर मैंने उसे अपने कपड़े उतारने को कहा.
वो बोली- ऐसे नहीं… पहले पर्दे लगाओ, गेट बन्द करो.
मैंने कहा- हम तीसरे माले पर हैं, चारों और पहाड़ हैं. मैनेजर ने भी कहा है कि कोई नहीं आएगा.. फिर भी!
बोली- नहीं… बंद करो.
“ठीक है…”

फिर मैंने पूछा- मसाज करवाओगी क्या?
वो बोली- वो क्या?
मैंने उसको बताया कि कुछ नहीं.. मसाज मतलब मालिश जो तुम मेरी करती हो.. इधर करवा कर देख लो, तुम्हें पसंद नहीं आये तो मना कर देना.
वो बोली- ठीक है.

मैंने फोन से मैनेजर को फुल बॉडी मसाज को कह दिया. उसने मुझे मसाज करने वाले को सिलेक्ट करने आने को कहा.

मैं गया और स्टाफ से मिलकर जो कि फीमेल थी. उसे समझाया कि धीरे धीरे करना और मैं जैसा इशारा करूँ, वैसे ही करना.

फिर मैं अपने रूम में आ गया. थोड़ी देर बाद दो मसाजर आ गईं.

हिन्दुस्तानी वस्त्र धारण करने वाली मेरी पत्नी ने कहा- ये क्या करेंगी?
मैंने कहा- कुछ नहीं तुम मेरे पास लेट जाओ.. जहाँ तुम्हें परेशानी हो रोक देना.

उन दोनों मसाजरों ने अपना काम करना शुरू किया. वो हमारे सिर में खूब सारा तेल डालकर मालिश करने लगीं. फुल एसी रूम में गर्म सी मालिश से, उसकी आंखें बन्द होने लगीं.. बस मुझे भी इसका ही इन्तजार था.

दूसरी मसाजर को मैंने अपनी पास से हटाकर पत्नी के पास भेज दिया और यह तय किया कि आज इसकी शर्म नहीं उतारी तो सारी पिकनिक ही व्यर्थ हो जाएगी. मैंने दूसरी मसाजर से कहा कि तुम इसके पांव की मालिश करो और धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ो और कुछ मत बोलना, वो कुछ कसमसाए तो भी ध्यान नहीं देना.
वो भी ठीक से समझ गई कि आज क्या होने वाला है. पर उसने इशारे में कहा पेमेन्ट कुछ ज्यादा लगेगा. मैंने भी हाँ कर दी.

दोनों मसाजर्स ने भी तय किया कि आज तो हो ही जाए.. बहुत दिन हुए मजे किए. सिर तरफ वाली मसाजर धीरे धीरे कन्धे और गर्दन की आने लगी. उसने पत्नी से धीरे से पूछा- मेम आपके कपड़े खराब हो जाएंगे, यदि परमिशन हो तो उन्हें थोड़ा ढीला कर दें?
उसने कहा- नहीं, मुझे ऐसा अच्छा नहीं लगता.
तो उसने कहा- यहाँ कौन देख रहा है.. साहब तो आपकी तरह आंख बन्द करके मालिश करवा रहे हैं. वो भी आपके पति ही तो हैं और हम भी आपकी तरह ही लड़की ही हैं.
कुछ देर ना जाने क्या सोचकर बोली- ठीक है जैसे तुम चाहो कर लो.

बस मुझे भी हरी झण्डी मिल गई. उसने उसके ब्लाउज के हुक खोलकर ढीले कर दिए और धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी. पैर की तरफ वाली भी अब घुटने तक आ गई थी और धीरे धीरे उसकी जांघें सहलाती हुई मालिश करने लगी.

मैंने उसे वहीं करने को कहा और सिर की तरफ से वह कन्धे और स्तनों तक बढ़ती हुई उसकी ब्रा के हुक खोलने लगी. एक पल के लिए वह कसमसाई, पर इस नीचे जांघ हो रही हलचल ने उसे रोक लिया. अब मैंने उसकी ब्रा को निकाल कर एक तरफ फेंक दिया क्योंकि मैं यह चाहता था कि वह पूरे समय बिना कपड़ों के ही रहे. खैर इसका उसे पता नहीं चला.

फिर हुआ असली काम शुरू.. ऊपर से स्तनों पर खूब सारा तेल डाला गया. फिर धीरे धीरे उसे सहलाने शुरू हुआ, तो मेरी पत्नी ने बिस्तर की चादर को कचोटना शुरू कर दिया. मैं समझ गया कि यही सही समय है.
मैंने नीचे वाली से जांघ से ऊपर बढ़ने का इशारा किया और उसकी मुनिया के बाल सहलाने शुरू कर दिए. पर उसका पेटीकोट बीच में आ रहा था. इसको उतारना थोड़ी टेढ़ी खीर थी.

खैर मैंने उससे कहा कि इसको छोड़, बस हाथ मत रोकना.. नहीं तो सारा खेल ही बिगड़ जाएगा. वैसे श्रीमती जी को सेक्स की क्रियाएं पसन्द नहीं हैं. पर जब ठंड का माहौल, शान्त जगह.. अकेले में दूर तक कोई आवाज नहीं, गर्म मसाज हो तो कोई भी हो, पिघलेगा ही.

फिर स्तनों से होती हुई वो नीचे को आने लगी.

अब तक मैंने आपका मसाजर स्टाफ से तो परिचय नहीं कराया था, अब जान लीजिएगा. ये दोनों महिला मसाजर. सिर की तरफ से जो शुरू हुई थी, उसका नाम मोनिका था और पैर की तरफ जो शुरू हुई थी उसका नाम मीना. मोनिका ने कहा कि यदि आप थोड़ा ऊंचा सा हों, तो कपड़े ठीक कर दूं.

श्रीमती जी समझी ही नहीं और ऊपर हो गईं. मैंने इशारा किया, वो दोनों पहले से ही तैयार थीं. वो जैसे ही ऊपर को हुई, मैंने उसका पेटीकोट खींच दिया. वो हड़बड़ाई..
मैंने पूछा- क्या हुआ??
तो वो कुछ बोल ही नहीं पाई क्योंकि मीना ने उसकी आंखें पर तेल लगाया था और तभी मोनिका उसकी जांघों को जोर जोर से सहलाने लगी थी.. तो उसे लगा कि मेरी तो आंखें बन्द हैं और मुझे कुछ पता नहीं है.

श्रीमती जी बोलीं- कुछ हुआ तो नहीं?
मैंने पूछा- कोई दिक्कत हो तो बताना, मैं यहीं पर हूँ.

पर अब मीना उसके स्तनों पर अपना कमाल दिखा रही थी और मोनिका उसकी चूत के घुंघराले बालों पर अपना जादू दिखा रही थी.

कोई कितना ही काबू करे, पर इस माहौल में दोनों तरफ से आने वाले मजे में लालच आ ही जाता है. उसने भी सोचा होगा कि देखते हैं क्या होता है.

बस फिर क्या था. जब मेरी समझ में आ गया कि अब यह नॉर्मल हो गई है. तो मैंने उसकी दोनों तरफ से खूब मसाज करवाई. लेकिन मैंने मीना और मोनिका को समझा दिया कि इसकी मुनिया को छूना भी मत.. केवल उसके आस पास से मालिश कर छोड़ देना.

अब दोनों को इशारा करके मैंने ऊपर की ओर ही कह भी दिया और उसकी खूब मालिश करने और उकसाने को कहा.

मोनिका और मीना भी मेरी भावना को समझ कर उसके स्तनों को खूब प्यार से.. खूब प्यार से तेल डाल डाल कर सहलाने लगीं.. और धीरे धीरे उसके निप्पल भी कठोर होकर खड़े हो गए.

मोनिका से तो रहा नहीं जा रहा था. वह तो उसके निप्पल काटने को तैयार ही थी, वो तो मैंने रोक दिया. नहीं तो सारा खेल ही बिगड़ जाता. पर इसमें उसकी भी कोई गलती नहीं है.. श्रीमती जी के स्तन इतने सेक्सी और मस्त हैं कि देखते ही मजा आ जाता है. मेरी श्रीमती जी का सारा शरीर थोड़ा सांवला है, पर कसा हुआ है. स्तनों को लगातार ढका रखने के कारण वे कुछ ज्यादा ही गोरे हैं और उसकी चूचियो के निप्पल सुनहरे रंग के हैं, जिसको देखते ही काटने को मन करता है.

मैंने पहली बार अपनी श्रीमती जी को पूर्ण निवस्त्र देखा तो मुझे लगा जैसे आज मैं निहाल हो गया. ये मेरी तमन्ना थी.

ऊपर भी मैंने जैसा बताया था कि मेरी एक फंतासी है कि मैं उसके साथ नग्न विचरण करना चाहता हूँ, जहां मुझे और उसे कोई नहीं जानता हो, पर बहुत सी आंखें हमें निहारें.. पर यह बात मैं श्रीमती जी को बताने से डरता था.

आज का सी देख कर लगा कि शायद आज यह कामना पूरी हो जाए. इसलिए उसके कपड़ों पर जो कि एक तरफ रखे थे.. मैंने पानी डाल दिया. मोनिका और मीना ने उसे पलट कर उसकी कमर की तरफ से मालिश करने लगीं. श्रीमती जी आंखें बन्द किए मालिश का आनन्द ले रही थीं. जीवन में ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था कि कोई उसकी मालिश कर रहा है और वह आनन्द में गोते लगा रही थी.

मैंने बीच में उससे पूछा कि सब ठीक लग रहा है.
उसे लगा कि मेरी भी मालिश हो रही है. तो उसने बिना देखे ही कहा कि मजा आ रहा है.
“हमारे कहने के मुताबिक रहोगी, तो मजा ही करोगी. बस आज के लिए भूल जाओ तुम कौन हो और जीवन के स्वर्ग का आनन्द लो.”

उधर वो दोनों अपने काम में लगी रहीं. श्रीमती जी इतनी मस्त हैं. मुझे कभी पता नहीं चलता यदि मैं इसे यहाँ नहीं लाता तो. घर पर केवल सेक्स होता है बन्द कमरा, लाईट बन्द.. दिन भर के थके हारे आओ, बस सेक्स करो और सो जाओ. कभी पत्नी के भाव को जीने का मौका ही नहीं मिला. खूबसूरत सुनहरे बदन वाली श्रीमती जी जरा भारी शरीर की मालकिन हैं. वो मुझे सदा ही मोटी लगती थी.. पर आज पता लगा कि वो मोटी बिल्कुल नहीं है, उसकी कमर मदमस्त है. उसके तो स्तनों के कारण वो ऐसा लगती है. उसके हिप्स इतने शानदार उठाव लिए हुए थे कि मोनिका और मीना बस उसे काटने को आतुर हो रही थीं.

जब वे दो महिलाएं ऐसा सोच रही थीं, तो सोचो, मेरा क्या हाल हो रहा होगा. पर मैं अपनी फंतासी को पूरा करना चाहता था. इसलिए बिल्कुल चुप था.

अब मोनिका ने इसको सीधा कर उसके चेहरे पर मसाज करना शुरू किया और मीना नीचे की तरफ आ गई. मीना उसकी मुनिया पर खूब सारा तेल डालकर मालिश करने लगी, लेकिन मैंने उसे ऐसा करने से रोक दिया और बहते हुए तेल को जांघ पेट पर रगड़ने को कहा. श्रीमती जी के चेहरे को मोनिका एक ठंडे टावल से ढक कर नीचे की तरफ आ गई. इसके बाद वे दोनों उस बहते हुए तेल को श्रीमती जी के पूरे पांव जांघ कमर स्तनों और हिप्स पर रगड़ने लगीं.
मैंने उन्हें सख्त हिदायत दी थी कि इसकी मुनिया को छूना भी मत.

कुछ ही बाद वही हुआ जो मेरी सोच थी. श्रीमती जी एकदम से अपने शरीर को ऐंठने लगीं और उन्होंने मोनिका तथा मीना से जाने को कह दिया. मुझे समझ आ गया था कि अब श्रीमती जी को अपनी चुदास मिटाना है. लेकिन मेरा असली मकसद तो ये था कि मैं मोनिका और मीना की मौजूदगी में ही श्रीमती जी की चुदाई करूँ.

मैंने मीना से इशारे में कहा कि तुम दोनों श्रीमती जी से कहो कि अभी आधा घंटे तक आँखें मत खोलना, नहीं तो तेल के कारण दिक्कत हो जाएगी.

तो मोनिका ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए श्रीमती जी की आँखों पर पट्टी बांधते हुए कहा कि ठीक है मेम आप आधा घंटे बाद पट्टी हटा दीजिएगा, वरना तेल के कारण आपकी आँखों को दिक्कत हो सकती है.
श्रीमती जी ने हामी भरते हुए कहा- हां ठीक है.. अब तुम दोनों जा सकती हो.

मैंने मीना की तरफ एक्स्ट्रा पैसे देने का इशारा किया और अपनी फंतासी पूरी करने पर आमादा हो गया. मैं चाहता था कि मैं दो अन्य हसीनाओं की मौजूदगी में श्रीमती जी की चुदाई का मजा लूँ.

बस मीना और मोनिका ने बाय बोलते हुए जाने का कहा और दम साध कर एक तरफ को खड़ी हो गईं.

उनके जाने का सोच कर श्रीमती जी एकदम से बिस्तर से उठीं और मुझे आवाज देते और टटोलते हुए मेरे बिस्तर पर आ गई.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
बोली- आग लग गई है.. जल्दी से मुझे चोद दो.
मैंने उसकी चूचियां मसलते हुए कहा- ऐसा क्या हो गया जानेमन?

उसने कुछ नहीं कहा. मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर सैट किया और धच से बैठ गई. उसकी आँखें बंद थीं और मेरी खुली थीं. साथ में मेरे सामने मीना और मोनिका भी मेरे खड़े लंड को श्रीमती जी की चूत में पेवस्त होते देख रही थीं. घमासान चुदाई शुरू हो गई.

मेरी जान मेरी श्रीमती मेरे लंड को आँख बंद करके अपनी चूत में चबाए जा रही थी. दसेक मिनट में ही उसका काम तमाम हो गया और मेरी फंतासी पूरी हो गई.

मैंने उठ कर बाथरूम जाने का कहा और पेंट की जेब से दो हजार रूपए अलग से देकर उन दोनों को विदा किया.

जाते वक्त मीना ने मेरे लंड को हिलाया और इशारे से पूछा कि अगर मैं उसे चोदना चाहूँ तो? मगर मेरा मन अपनी प्यारी श्रीमती जी के अलावा और किसी के साथ सेक्स करने का नहीं था.

मेरी इस सेक्स स्टोरी पर आपके मेल की प्रतीक्षा रहेगी.

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