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मेरी मदमस्त रंगीली बीवी-8

मैं अपनी सांसें रोके उन तीनों को देख रहा था, मुझको पता ना था कि अगले कुछ मिनट में मैं किसी विदेशी ब्ल्यू मूवी से भी ज्यादा गर्म थ्रीसम धमाकेदार चुदाई देखने वाला हूँ।

सच सेक्स का ऐसा नंगा नाच जिसे देख कर ही लन्ड से पानी की नदियाँ बह जायें!

ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ भी!
ये दोनों गँवार लड़के भी पता नहीं कैसी राजकुमारों की सी किस्मत लेकर पैदा हुये होंगे कि एक तो इन्होंने राजकुमारी जैसी मेरी सलोनी को बिना कपड़ों के नंगी देखा और अब उसी के साथ अपने जीवन की सर्वाधिक मज़ेदार चूत और गांड चुदाई कर रहे थे।

सलोनी ने पप्पू को नीचे लिटाया और उसकी कमर के दोनों ओर पैर करके उसके ऊपर को खड़े लन्ड पर बैठ गई। उसकी पीठ पप्पू के मुँह की तरफ़ थी, उसका चेहरा दरवाजे की ओर था इसलिए उसकी चूत में जाते हुए लन्ड साफ़ दिख रहा था।
और उस पर कयामत उस की चूचियाँ जो इधर उधर झूल कर मज़ेदार सेक्सी दृश्य उत्पन्न कर रही थी।

तभी कलुआ उसके सामने आकर खड़ा हुआ और एक बार फिर सलोनी ने अपने हाथ से उसका लन्ड पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया।
नीचे से पप्पू अपके कूल्हे हिला रहा था और साथ ही सलोनी भी उसके लन्ड पर बैठी डांस कर रही थी।

आप हम तो केवल चूत और लन्ड के इस संगम के नज़ारे को सोच कर अपना लन्ड ही हिला ही सकते हैं और लड़कियाँ अपनी उंगली अपनी चूत में कर सकती हैं।

पप्पू और सलोनी तो पूरे मदहोश हुए पड़े थे, पप्पू का लन्ड सलोनी की चूत के हर एक कोने में घूम रहा था कभी धीरे से… तो कभी तेज तेज… कभी ऊपर.. कभी नीचे… तो कभी गोल गोल… कई तरह से सलोनी की चुदाई हो रही थी।

साथ ही कलुआ का लन्ड भी उसके मुँह से बाहर नहीं निकल रहा था।

फिर सलोनी ऐसे ही पीछे लेट गई तो कलुआ भी घूम कर उधर आ गया और फिर सलोनी उसका लन्ड चूसती हुई सेक्सी से भी अधिक सेक्सी चुदक्कड़ दिख रही थी।
इस पोज़िशन में सलोनी की चूत में अन्दर बाहर होता लन्ड साफ नज़र आ रहा था।

और अब कलुआ ने एक बार फिर से पप्पू को हिलाया और सलोनी को उसके ऊपर से हटाया, कलुआ नीचे लेटा और उसने सलोनी को अपने ऊपर आने का इशारा किया।

इस बार सलोनी उसकी तरफ़ ही मुख करके कलुआ के लन्ड पर बैठी और अब कलुआ का लन्ड सलोनी की चूत में आवागमन कर रहा था।
एक ही बार में लन्ड बदल बदल कर सलोनी को अपनी चूत चुदवाने में बहुत मज़ा आ रहा होगा।

इस पोज़िशन में सलोनी तेज़ी से अपनी कमर हिला रही थी, लगता था कि अब उसे चरम सीमा पर पहुँचने की जल्दी थी।
वो कलुआ के लन्ड पर बैठी हिल ही रही थी कि इस बार पप्पू ने हिम्मत की और मुझे वो नज़ारा देखने को मिल गया जो मैंने कभी सलोनी से तो उम्मीद भी नहीं की थी।
हो सकता है सलोनी ने भी इसे पहली ही बार किया हो!

पप्पू ने आगे झुकी हुई सलोनी पीछे जाकर एक बार फिर अपना लन्ड सलोनी की गांड के छेद पर सेट करके अन्दर डाल दिया…
आअहह… आआ… सलोनी की हल्की सी चीख निकली पर पप्पू की पकड़ मजबूत थी अगर सलोनी कोशिश भी करती तो वो पप्पू का लंड अपनी गांड से निकालने में असफल रहती।

अब एक साथ दो दो लन्ड सलोनी के अंदर थे। पप्पू का लन्ड सलोनी की गांड में और कलुआ का लंड उसकी चूत में!
और कमरे में अनवरत असंख्य सिसकारियाँ… अह्ह आअह ओह्ह ऊई आअह्हा आअह्ह ओह ऊई इइइ आअह हह ओह्ह्ह ऊईय आअह ओह्ह इइइ म्म्माआ मरर्र गई… आअह्ह्हा आआआ

ना जाने कितनी बार उन्होंने जगह बदल बदल कर सलोनी की चूत और गांड को चोदा और साथ साथ पप्पू और कलुआ अपनी सेक्सी बातें भी करते रहे।

सलोनी चुदवाते चुदवाते उनसे पूछने लगी- यह तो बताओ कि तुम दोनों वहाँ किस किस को चोदते हो और पहली बार कैसे चोदना शुरू हुआ तुम्हारा?

पप्पू ने पीछे से सलोनी को चोदते चोदते बताया- मैडम, हम दोनों वहीं सेठ के गैरेज में सोते हैं, हम दोनों को एक दूसरे का लन्ड हिलाने की आदत है तो कई बार रात को नंगे भी सो जाते थे।
एक दिन सवेरे सेठानी जल्दी आई हम दोनों नंगे सो रहे होंगे, सेठानी ने कलुआ का लन्ड देख लिया, सुबह को लन्ड खड़ा ही होता है, बस सेठनी ने उसे पकड़ लिया और लगी खेलने लन्ड से!
शुरू में तो हम को कुछ डर सा लगा फ़िर उन्होंने ही हम दोनों को ये सब सिखाया।
हम दोनों ही सेठानी को चोदने लगे, वे अपनी चूत और गांड दोनों ही चुदवाती हैं, हर दूसरे तीसरे दिन सवेरे आती और चुदवा लेती हैं।

सलोनी ने पूछा- है कैसी तुम्हारी सेठानी?
कलुआ- मैडम, वो तो माल है पूरी… हमारा सेठ तो बुढ़िया गया है…पर सेठानी अभी ज़वान है दो बेटियाँ होने के बाद भी! सब तरफ़ से टाइट है।

पप्पू- हां मैडम… सेठानी तो है ही सुंदर… उनकी बेटियाँ तो और भी ज्यादा सेक्सी हैं। दो बेटियाँ हैं उनकी… अभी कॉलेज में पढ़ रही हैं… फिर उन दोनों ने पता नहीं कैसे अपनी मम्मी को हमारे साथ देख लिया और उन्हें भी पता चल गया तो कॉलेज से आने के बाद वे हम में से किसी एक को किसी ना किसी बहाने से बुलाती हैं और हम दोनों ने ही उन दोनों को चोदा है। बड़ी बेटी ने तो अपनी एक सहेली को भी मुझसे चुदवाया है, कलुआ से उसने नहीं चुदवाया।

ऐसी ही बात करते हुये वे चुदाई के आनन्द को और भी बढ़ा रहे थे।

और ऐसे में ही कलुआ की सिसकारियाँ निकलने लगी, लगने लगा कि उसका काम तमाम होने वाला है।

इस बार सलोनी ने पूरे जोर से पप्पू को हटाया, पप्पू भी समझ गया, वो पीछे हटा और कलुआ जल्दी से सलोनी की चूत से अपना लंड निकाल कर सलोनी के चेहरे के पास आ गया।

सलोनी वैसे ही झुकी रही, पप्पू एक बार फिर से उसकी गांड में लन्ड डालकर चोदने लगा और कलुआ का लन्ड सलोनी के हाथ में था।
कलुआ भी उसको तेज तेज हिला रहा था तो उसका माल ज़ल्दी ही निकल गया, उसने एक बार फिर सलोनी के चेहरे और बदन को चिप चिप कर दिया।

उधर पप्पू भी अब आखिरी दौर में ही था, उसने अपना लन्ड बाहर निकाला और सलोनी की पीठ को अपनी मलाई से भर दिया।

और अचानक दरवाजे पर…
ठक… ठक…!
? अब कौन आ गया?

कहानी जारी रहेगी।

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