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मेरी चालू बीवी-17

इमरान
सलोनी- मैंने मना किया न… मैं केवल ब्रा चेक करुँगी… बस… पैंटी घर जाकर चेक करके बता दूँगी… यहाँ नहीं..
लड़के का मुँह देख लग रहा था जैसे उसके हाथ से ना जाने कितनी कीमती चीज छीन ली गई हो…
सलोनी- ओह ज़मील, आज मुझे जल्दी जाना है… फिर कभी तुम घर आकर आराम से चेक कर लेना…
और सलोनी ने झुककर उस लड़के के मुँह पर चूम लिया…

बस अब तो कबीर की प्रसन्नता का गुब्बारा फट पड़ा..
उसने सलोनी को कसकर अपनी बाँहों में भर लिया…

उसने अपनी कमर सलोनी के चूत वाले भाग पर घिसते हुए ही बोला…
लड़का- मैडम जी कल से आपकी याद में मेरा लण्ड खड़ा ही है… यह साला बैठने का नाम ही नहीं ले रहा…
साफ़ लग रहा था कि वो अपना लण्ड सलोनी कि चूत पर रगड़ रहा था… चाहे कैप्री के ऊपर से ही…

लड़का- मैडम जी, जब से आपकी इतनी प्यारी चूत देखी है… मेरा लण्ड ने तो जिद पकड़ ली है कि एक बार तो वहाँ जरूर जाऊँगा…
सलोनी- ओह छोड़ो ना…

लड़का उसको और कसकर चिपकते हुए- …सच मेमसाब मैंने पूरी जिंदगी में इतनी प्यारी और चिकनी चूत नहीं देखी… यहाँ बाहर मेरे यहाँ 6-7 लड़कियां काम करती हैं, मैं सबको यहीं कई बार चोद चुका हूँ… मगर सबकी चूत आपकी चूत के सामने बिल्कुल बेकार है…
सच कहूँ कल एक बार आपकी चूत छूने से ही मेरा पानी निकल गया था… और आपके पति भी कितने अच्छे हैं, उन्होंने खुद अपने हाथों से मेरे को मजा करवाया…

सलोनी- ओह नहीं…!!!
लड़का- अहा हा… ह्ह्ह… सही मैडम जी… मैंने 3-4 शादीशुदा को भी चोदा है और मेरी दिली इच्छा थी कि काश मैं उनको… उनके पति के सामने चोदूँ… पर वो सभी ना जाने क्यों डरती हैं… सुसरी चुदवाते हुए तो खूब आवाज करेंगी पर पति से कहने से भी डरती हैं… पर आप एकदम अलग हो, आप तो अपने पति के सामने ही मजा करती हो… आपको तो भाई शाब के सामने ही चोदूंगा…

तभी अचानक सलोनी ने उसको कसकर धक्का दिया… वो पीछे को हो गया…
सलोनी- बस बहुत हो गया… अब मुझे जाने दो… और हाँ वो मेरे पति नहीं थे समझे… तुम अपना काम करो… मैं ऐसी वैसी नहीं हूँ…

लड़का- ओह सॉरी मैडम जी… वो मैं समझा इसीलिए… इसका मतलब…
सलोनी ने जल्दी से अपनी शर्ट पहनी और… जल्दी जल्दी वहाँ से बाहर निकल गई…
मैं और वो लड़का भौंचक्के से उसको जाते देखते रह गए…
कि अचानक यह हुआ क्या?

मैं वहाँ खड़ा अभी सलोनी के बारे में सोच ही रहा था कि यह अचानक उसको क्या हुआ…
वो चुदवाने को मना तो कर सकती थी… मगर इस तरह… अपनी नई वाली कच्छी-ब्रा भी छोड़कर यूँ भाग जाना…?
जरूर कोई बात तो है…

मैं वहाँ से निकल… सलोनी के पीछे जाने की सोच ही रहा था… और उस लड़के कबीर के हटने का इन्तजार कर रहा था कि…
लगता था कि कबीर कुछ ज्यादा ही गर्म हो गया था… उसने अपना लोअर नीचे कर अपना लण्ड बाहर निकाल लिया…
उसका लण्ड कुछ बहुत ही अजीब सा था… 6-7 इंच लम्बा और शायद 2.5 से 3 इंच मोटा… पर उसका सुपाड़ा बहुत खतरनाक था… बिल्कुल खुला और बहुत मोटा…

मुझे लगा कि इसके लण्ड का यह अगला भाग अच्छी अच्छी चूतों की चीखें निकाल देता होगा…
और खास बात यह थी कि लण्ड बहुत अजीब तरीके से मुड़ा हुआ था, एकदम सीधा नहीं था…
तो इस समय वो अपने लण्ड को सहलाते हुए ही बात भी कर रहा था… जैसे उसको समझा रहा हो…
लड़का- ओह मेरे यार, मैं क्या करूँ… साली, अच्छी खासी पट गई थी… मगर ना जाने क्या हुआ… पुच…पुच… मान जा… फिर किसी दिन दिलाऊँगा…

मैं अभी यह सोच ही रहा था… कि क्या सलोनी को उसके इस भयंकर लण्ड का आभास हो गया था… जो वो ऐसे भाग गई?
कि तभी उस लड़के और मेरी नजर एक साथ ही सामने एक परदे पर पड़ी…
वहाँ एक लड़की जो शायद उसी दुकान पर काम करती थी… दिखी.. जो छुपकर जाने का प्रयास कर रही थी…

लड़का- ऐ एएए… नाज़नीन… इधर आ… तू क्या कर रही है… यहाँ…
मैं स्थिति को समझने का प्रयास कर ही रहा था… कि उस लड़के के पास आ गई थी…
मगर वो अभी भी लण्ड को अपने हाथ से पकड़े उससे बात कर रहा था… उसने अपना लण्ड अभी तक लोअर के अंदर नहीं किया था…

नाज़नीन- वो सर… मैं तो आपको ही ढूंढ रही थी… ये सामान दिखाना था… उसके हाथ में दो ब्रा थीं…
नाज़नीन कोई 5 फुट की छोटे कद की, पतली दुबली… सांवले रंग की थी… उसके पहनावे और मेकअप से लग रहा था कि वो एक गरीब परिवार की होगी…

उसने एक सस्ती सी झीनी काले रंग की कुर्ती और सफ़ेद टाइट पजामी पहनी थी… कुर्ती से उसकी ब्रा साफ़ दिख रही थी…
उसने अपने कंधे तक के बालों को खुला छोड़ रखा था… जो कुछ बिखरे हुए भी थे…
उसकी चूचियाँ तो कुछ खास नहीं थीं…कुर्ती से हलकी सी ही उभरी हुई दिख रही थीं…
मगर हाँ उसकी गांड काफी उभरी हुई दिख रही थी… जो उसके पूरे शरीर का सबसे आकर्षक भाग था…

तभी…
वहाँ एक मोबाइल बजने लगा…
लड़का- रुक तू अभी… यह तो उसी का फोन है… हाँ मैडम जी, क्या हुआ आप इतना नाराज क्यों हो गई… अगर मुझसे कोई गलती हो गई हो तो माफ़ कर दो… अपना सामान तो ले जाती…
…ओह ये तो सलोनी का ही फोन था… मैंने रात को अपने वॉयस रिकॉर्डर से जान लिया था कि सलोनी ने उससे क्या बात की थी… जो यहाँ बता रहा हूँ…

सलोनी- अरे मैं तुमसे नाराज नहीं हूँ… वो वहा कोई खड़ा था ना… इसलिए मैं आ गई… मुझे बहुत शर्म आ रही थी… वहाँ…
लड़का- अरे मैडम जी ये कोई नहीं… नाज़नीन ही थी… आप ही के कपड़े लेकर आई थी… यह यहाँ सिलाई का काम करती है… इससे न डरो… आप आ जाओ…

सलोनी- अरे नहीं, अब नहीं… और वहाँ मुझे अच्छा नहीं लगा… तुम्हारे यहाँ एक चेंज रूम भी होना चाहिए ना…
लड़का- अब क्या करूँ मैडम जी… वो हो ही नहीं पाया… मगर आप डरो नहीं… यहाँ कोई नहीं आता…केवल यही सब ही आती हैं… बस…

सलोनी- छोड़ो ये सब, तुम ऐसा करना, मैं बता दूंगी… मेरे घर ही भिजवा देना… या खुद ही ले आना…मैं वहीं चेक करके बता दूँगी…
लड़का- ठीक है मैडम जी, बताओ… कहाँ??… मैं अभी आ जाता हूँ…

सलोनी- अरे अभी तो नहीं… मुझे अभी बाजार में ही काम है… और फिर इनके ऑफिस जाना है… फिर 1-2 दिन में बता दूंगी…
लड़का- ओह मैडम जी… यह तो बहुत बुरा हुआ… इस साली की वजह से…
वो नाज़नीन को बालों से पकड़ अपने लण्ड पर झुका देता है… जो फिर से तन गया था…
और इस समय कहीं ज्यादा भयंकर हो गया था… यह शायद सलोनी की सेक्सी आवाज के कारण हुआ था…

नाज़नीन भी उसके लण्ड को अपने हाथ से पकड़ झुक कर उसको पुचकारने लगती है…
मैं उस लड़के की किस्मत पर रस्क करने लगता हूँ… कि क्या किस्मत है साले की…
अभी कुछ देर पहले मेरी बीवी के मम्मो को मसल रहा था… और अब इस लड़की से अपना लण्ड चुसवा रहा है…

नाज़नीन की पीठ मेरी ओर थी… जब वो झुकी तो उसकी कुर्ती उसके मोटे चूतड़ों से ऊपर सरक गई…
ओह माय गॉड… उसके विशाल चूतड़ केवल सफ़ेद टाइट पजामी में मेरे सामने थे…
उसके चूतड़ उसकी उस इलास्टिक वाली पजामी में नहीं समां रहे थे…

उसके झुकने से उसकी पजामी उसके चूतड़ों से काफी नीचे को फिसल रही थी जिससे उसके चूतड़ों का ऊपरी हिस्सा… और चूतड़ों की दरार तक साफ़-साफ़ दिख रही थी…
उसने एक काली कच्छी भी पहनी थी… जो पूरी साफ़ उसकी पजामी से दिख रही थी…

लेकिन उसकी कच्छी बहुत पुरानी थी… जिसकी इलास्टिक तक ढीली हो गई थी…
जो उसकी पजामी के साथ ही नीचे को सिमट गई थी…
इस सेक्सी नज़ारे को देख मैं सलोनी को भूल गया… सोचा उसको तो बाद में भी देख लेंगे… पहले इसको ही देखा जाये…

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लड़का अपना लण्ड चुसवाते हुए… सलोनी से अभी भी बात कर रहा था…
लड़का- क्या मैडम जी, आप तो मेरा खड़ा करके भाग गई… अब मैं क्या करूँ…?

सलोनी- तुम पागल हो क्या? इसमें मैं क्या कर सकती हूँ… वो तुम समझो… मुझे मेरे कपड़े चाहिए बस… बाकी अपना जो भी है वो तुम जानो… हे हे हे हे हा हा…
लड़का- मैडम जी ऐसा ना करो…

सलोनी- अच्छा ठीक है… फिर बात करती हूँ… अभी तुम अपना काम करो… बाय…
लड़का- ओह नहींईई मैडम जी… ये क्या…
और वो गुस्से में ही… उस बेचारी नाज़नीन पर टूट पड़ता है…
कहानी जारी रहेगी।

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