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मेरी और मेरी कामवाली की चुदास-6

अब तक इस हिंदी चुदाई स्टोरी में आपने पढ़ा था कि दीपक ने मेरी दमदार चुदाई करके मुझे तृप्त कर दिया था और अब वो मुझे दुबारा चोदने के लिए कह रहा था. इसके पहले कि चुदाई हो, बाहर से मंगाया हुआ खाना आ गया था.
अब आगे..

फिर हमने मिल कर खाना खाया.

मैं देख रही थी कि उसका लंड फिर से उछलने लगा था. मैंने उससे कहा- मैं अपने लंड को देख रही हूँ, यह तो बहुत बदमाश है.. जब भी मुझे देखेगा, यह यूँ ही सलामी दिया करेगा. खैर अभी तो तुम इसको ढीला करो.

यह कह कर मैंने अपनी चूत नंगी करके उसके आगे कर दी. उसने भी अपना मूसल लंड मेरी चूत में डाल कर भयंकर चुदाई शुरू कर दी. लगभग 20 मिनट तक चोदने के बाद उसने अपना लंड बाहर निकाला और अपना सारा पानी मेरे मम्मों पर गिरा दिया. फिर मम्मों को चाट चाट कर साफ भी कर दिया.

कुछ देर बाद मैं उठी और बाथरूम में जा कर अपने आपको अच्छी तरह से साफ किया और कपड़े डाल कर वापिस घर आ गई.

उधर वो लड़का पिंकी के तो पीछे ही पड़ गया था. वो कहता था कि मैं तुम्हें प्यार करता हूँ और शादी भी करना चाहता हूँ.
जब मुझे पता लगा, तो मैंने कहा कि उसे कल घर पर बुलाओ, मैं उससे मिल कर सोचती हूँ कि क्या करना है.

अगले दिन वो लड़का उसके साथ ही घर पर आया. मैंने देखा कि वो देखने में ठीक ठाक था और उसकी नौकरी भी ठीक थी.
मैंने उससे पूछा- तुम्हारे घर वाले मानेंगे?
वो बोला- हां मान जायेंगे मगर आपको उनके पास जाना पड़ेगा.
मैंने कहा- ठीक है. तुम उनसे समय पूछ कर बताओ.

उसने अपने घर पर बात की और मुझे बता दिया.

निश्चित समय पर मैं और दीपक यह बताते हुए उसके घर पर पहुँचे कि हम पति पत्नी हैं और यह मेरी बहन है.

उन्होंने हमारी अच्छी तरह से खातिरदारी की और बोले- देखिए हम लोग नीची जात से हैं.. आप सोच समझ कर बात करिएगा.
मैंने कहा- जो आपको नीची जाति का बोलता है, वो खुद ही नीचा है. हमारी नज़रों में आपमें और हममें कोई फरक नहीं है, आप हमारे घर आइएगा, हम एक ही थाली में खाना खाएँगे. पिंकी मेरी मामा की लड़की है और इसके माँ बाप अब दुनिया में नहीं हैं. अब इसकी शादी की जिम्मेदारी हमारी ही है.

उनको हमने अपने घर पर बुलाया और कहा कि आप लड़की को देख लीजिए फिर बात पक्की करेंगे. लड़के की माँ ने कहा- जब लड़का लड़की एक दूसरे को पसंद करते हैं, तो फिर बात पक्की ही समझिए.
मैंने कहा- नहीं.. उनकी सोच एक अलग बात है, मगर आपकी बिना रज़ामंदी के कोई रिश्ता पक्का नहीं हो सकता.
यह सुन कर वो बहुत खुश हुईं और बोलीं कि कल शाम को ही हम लोग आते हैं.

दूसरे दिन लड़के के माँ और बाप दोनों ही आए और मैंने और दीपक ने उनका पूरी तरह से स्वागत किया. पिंकी को बिल्कुल घरेलू लड़की की तरह से सजाया था ताकि उसका असली रूप उनको ना दिखे.. वरना बात बिगड़ सकती थी.

जब वो लोग आए, तो मैंने लड़के की माँ और अपने लिए एक ही प्लेट में खाने का सामान रखा और उसी को दोनों ने अपने अपने चम्मचों से खाया.

इसके बाद मैंने पूछा कि अब भी आपको लगता है कि आपमें और हम में कोई भेद है?
वो बोलीं- आपके व्यवहार ने तो मेरे दिल को ही जीत लिया है और मुझे कुछ भी कहने के लिए नहीं छोड़ा. एक ही कप से आप और मैं दोनों ही आइस्क्रीम निकाल कर खा रहे हैं और किसी को नहीं लगता कि वो दूसरे की झूठी खा रही हैं.

फिर मैंने पिंकी को बुलाया और लड़के की माँ को बताया कि यह मेरी सगी बहन जैसी है, जो अगर आप चाहेंगी तो आपके घर की बहू या लक्ष्मी बन कर जाएगी.

पिंकी को देखते ही उसकी आंखें खुली की खुली रह गईं. वो बोलीं- चाँद का टुकड़ा जैसी लड़की है.. यह तो मेरे घर का चिराग बन जाएगी, अगर यह मेरी बहू बन गई.. मुझे तो बिल्कुल मंजूर है. अगर आप कहें तो मैं इसे आज ही अपने साथ ले जाऊं, किसी मंदिर में ले जा कर अपने लड़के की शादी करवा दूँ.

मैंने कहा- आंटी इतनी जल्दी नहीं.. अभी तो इसकी पूरी तरह से शादी करना है. इसके भी कुछ अरमान हैं. अगर इसके माता पिता नहीं हैं.. तो क्या हुआ, मैं तो हूँ ना. इसे कभी पता नहीं लगना चाहिए कि इसका कोई नहीं है. हम लोग खूब धूमधाम से और अच्छी तरह से इसकी शादी करेंगे. आप पूरी बारात लेकर आइएगा ताकि उसको भी पता लगे कि उसकी हम लोग कितनी इज्जत करते हैं. आप सबको सर आँखों पर बिठाएँगे.

इस तरह से वो शादी की बात पक्की कर के जब जाने लगी तो लड़के के माँ बाप को 5000-5000 दे कर कहा कि हमारी तरफ से रिश्ता अब पक्का हो गया है और यह अब आपकी बहू है. चूंकि ये दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं.. और कहीं कोई ऊंच नीच ना हो जाए इसलिए आप जल्दी ही शादी का मूहुर्त निकलवा लें.

लड़के की माँ ने कहा- जी आप बिल्कुल सही कहती हैं. मुझे आपकी पिंकी पर तो पूरा विश्वास है कि वो कुछ नहीं करेगी मगर अपने लड़के पर ज़रा भी विश्वास नहीं है.. क्योंकि वो कुछ भी कर सकता है. हो सकता है उसका दिल पिंकी को देख देख कर पूरा बेईमान हो जाए. मैं जल्दी से शादी की तारीख निकलवाती हूँ.

मैंने उसके सामने ही पिंकी को आँख मार कर कहा- सुन लिया ना आंटी को.. जो अब तुम्हारी सासू अम्मा हैं.
पिंकी सर झुका कर चुप रही. उसके जाने के बाद मैंने उससे कहा- अगर दिल करे तो दोपहर को उसे यहाँ ले आना और मज़े कर लेना दिल खोल कर.

वो बोली- दीदी आप कितनी अच्छी हैं, जो मेरे को बिना कहे ही उसके दिल की बात सुन लेती हैं.
मैंने कहा- तुम और मैं दोनों एक ही नाव के मुसाफिर हैं.

मुझे पता था कि वो उसको घर पर लाएगी और उससे दिल खोल कर चुदवाएगी. शादी से पहले ही पूरी सुहागरात मनाएगी.

खैर मैं उसको क्या कहती, मैंने तो खुद भी मनाई थी. यह जानने के लिए कि पिंकी और उसका होने वाला पति कैसे चुदाई करते हैं, मैंने एक सीसी कैमरा उसके बेडरूम में लगा दिया, जिस पर सब कुछ दिखे और सब कुछ रिकॉर्ड भी हो जाए. उसके साथ मैंने वीडियो रिकॉर्डेर भी अटॅच कर दिया. मगर यह सब मैंने इस तरह से किया कि पिंकी को कुछ पता नहीं लगा.

दो दिनों बाद मैंने उसकी चुदाई की रिकॉर्डिंग देखी, जो किसी ब्लू फिल्म से कम नहीं थी. मैंने देखा कि शायद दोनों ने ही 2-3 घंटे पहले ऑफिस से छुट्टी कर ली थी और सीधे यहाँ पहुंच गए थे, ताकि मेरे आने से पहले अपनी सुहागरात मना लें.

जब रिकॉर्डिंग शुरू हुई तो उसका समय शाम का 4.30 था. इसका मतलब कि वो 4 बजे से पहले ही ऑफिस छोड़ कर आए थे. इसके बाद उनको घर में आने के बाद दरवाजा बंद करके बेडरूम में आने के लिए 4-5 मिनट लगे होंगे. बेडरूम में पहुँच कर मुन्ना (उस लड़के का नाम, जिससे पिंकी की शादी होनी थी) ने पिंकी को अपने पास खींच कर जोर से गले लगा लिया और उसके होंठों को चूसने लगा. पिंकी किसी भी तरह का विरोध नहीं कर रही थी बल्कि उसका पूरा साथ दे रही थी. फिर उसने उसका टॉप और जीन्स उतार दी और अपनी भी निकाल दी.

मुन्ना इस वक्त सिर्फ चड्डी में था और पिंकी ब्रा और पेंटी में थी. मुन्ना ने उसकी ब्रा भी खोल कर दूर फेंक दी. बस फिर क्या था, वो उसकी चुचियों पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा.

पिंकी बोल रही थी- आह अरे यार.. ज़रा धीरे से दबाओ.. जोर से दर्द होता है. मगर वो कहाँ रुक रहा था. वो बोल रहा था कि आज बहुत मुश्किल से तो तुम हाथ लगी हो. मुझे तो अब तक तुम्हारी चूचियों के दर्शन करना भी नसीब नहीं हुआ था. अब ना रोको मुझे.. आज सब कुछ पाने की लालसा है.

वो पिंकी के निपल्स को चूस रहा था. साथ ही एक हाथ से उसकी चड्डी भी उतार रहा था. शायद पिंकी को आज के प्रोग्राम का पूरा पता था, इसलिए उसने पूरी तरह से चूत को साफ किया हुआ था.

जब मुन्ना ने पिंकी की चूत को देखा तो ख़ुशी से उछल पड़ा- वॉव पिंकी तुम्हारी चूत तो बहुत मस्त है.. अब नहीं रहा जाता इसके बिना..

यह कह कर वो सब कुछ भूल कर उस पर अपना मुँह उस पर मारने में लग गया. पहले वो चुत को ऊपर से ही चाटता रहा. फिर वो चूत को खोल कर ऐसे देख रहा था, जैसे किसी बच्चे को कोई उसकी कोई मनचाही वस्तु मिल गई हो.

कुछ देर के बाद मुन्ना अपनी ज़ुबान चूत में फेरने में लग गया. उधर पिंकी भी अपनी चूत ऊपर करके चुत चुसाई का मज़ा ले रही थे.

फिर दोनों ही 69 में आकर एक दूसरे के चूत और लंड को चूसने लगे. दोनों ने अपना अपना पानी छोड़ा और दोनों ही पी गए.

मुझे नहीं पता कि मुन्ना को चूत मारने का पहले से कुछ ज्ञान था या नहीं.. मगर पिंकी तो पूरी खेली खाई थी.

जब यह सब हो चुका तो देखा कि 6 बजने वाले थे. तब पिंकी मुन्ना से बोली सुनो दीदी के आने का टाइम होने वाला है. वो नॉर्मली 7 बजे घर पर आती हैं, इसलिए तुम्हें अब जाना पड़ेगा.

उसने जानबूझ कर यह सब कहा होगा ताकि वो उसकी चूत पर जल्दी से अपना लंड डाले.

मुन्ना बोला- अभी कैसे जा सकता हूँ? चूत की सेवा तो की ही नहीं.

इतना बोल कर उसने अपने खड़े हुए लंड को पिंकी की चूत में पेल दिया. फिर तो चुदाई को वो दौर शुरू हुआ कि क्या बताऊं. ऊपर से मुन्ना के ताबड़तोड़ धक्के और नीचे से पिंकी की उछलती चूत, जो हर धक्के का जवाब अपने धक्के से दे रही थी.. मस्त समा बन गया था. फिर 15 मिनट की चुदाई के बाद जब लंड ने पानी छोड़ना शुरू किया तो मुन्ना ने पिंकी की चूत को ही भर दिया.

इस पर पिंकी उससे कहने लगी- क्या दहेज में बच्चा लाना है.. तुम्हें शरम नहीं आई.. तुमने अन्दर क्यों किया?
वो बोला- अरे यार रुका ही नहीं गया, मुझे चुदाई का कोई तजुर्बा नहीं है. अगर अन्दर हो भी गया तो कोई तुम को कुछ नहीं कहेगा.

पिंकी झट से उठ कर बाथरूम में भागी और अपनी चूत को अन्दर बाहर से धोकर वापिस आई, वो बोली- कल तुम जाकर गर्भ निरोधक गोली लेकर आना.. मैं केमिस्ट के पास नहीं जा सकती, मुझे शरम आएगी. अब जल्दी से उठो और कपड़े डाल कर निकलो यहाँ से.. वरना दीदी को सब कुछ पता लग जाएगा.

मुन्ना ने जल्दी से कपड़े डाले और बोला- मैं अभी गोली खरीद लूँगा और तुमको सुबह सुबह दे दूँगा ताकि अगर प्राब्लम होगी तो भी उससे छुटकारा मिल जाए. कोई घबराने की बात नहीं है. अम्मा भी कल बापू से बोल रही थीं कि सुनो जी अपना लड़का ज़रूर पिंकी से कुछ ना कुछ करेगा. वो भी तुम्हारे पर ही गया है. लंड को हाथ में लिए घूमता है. जब पिंकी सामने होगी तो उसे उसकी चूत की दिखाई देगी और कुछ नहीं, इसलिए उसकी अगले 15 दिनों में ही शादी कर दो.

इस पर बापू बोले कि इतनी जल्दी नहीं हो सकती. मैंने पंडित से पूछा था, उसने कहा कि जल्दी से जल्दी भी करोगे तो एक महीने बाद की तारीख निकलती है. मेरा बापू अम्मा से बोल रहा था कि तुम अपनी चूत की फिक्र करो, रात को तैयार रखना.. आज मैं इसको चाटूँगा.

पिंकी बोली- इसका मतलब है कि एक कमरे में मैं चुद रही होऊंगी और दूसरे कमरे में सासू माँ. वॉव फिर तो पूरा घर चुदाई घर बन जाएगा.
मुन्ना हंस पड़ा और वहाँ से निकल गया.

अगले कुछ दिनों बाद मुझे मुन्ना की माँ ने बताया कि वो 50 के करीब अपने रिश्तेदारों को बारात में लाएगी और शादी की तारीख भी बता दी.

मैंने जल्दी से एक केटरर से 50 बाराती और 5 10 अपनी तरफ के मिला कर 60 लोगों की व्यवस्था करवा दी. मैंने उसको कहा कि खाना आदि सब मस्त होना चाहिए.
फिर नियत समय पर बारात आई. उनकी पूरी तरह से खातिरदारी की गई और शादी कर दी गई.

मैंने उसके जितने पैसे बैंक में थे, सब निकलवा कर.. और कुछ अपनी तरफ से मिला कर उनको दहेज में ज़रूरी ज़रूरी वस्तुएं दीं और एक हनीमून ट्रिप ऊटी का बुक कर दिया.

मैंने पिंकी से कहा- मुझे पता है कि तुम हनीमून अपना यहीं पर मना चुकी हो मगर अब क़ानूनन हनीमून मनाओ और अगर बच्चा पेट में आ भी जाए तो कोई चिंता ना करना.. खुल कर मज़े से चूत को चुदवाओ.

वो बहुत खुश थी और विदा होने से पहले मुझसे बोल रही थी कि दीदी आप ज़रूर पिछले जन्म में या तो मेरी माँ रही होंगी या फिर मेरी बड़ी बहन, जो कि मेरी देखभाल करती रही होंगी. वरना आजकल के जमाने में लड़की की कौन परवाह करता. मुझ जैसी अनाथ को मात्र एक चुदाई की चूत समझा जाता रहा, उसे चुदवा कर पैसे कमाने का जरिया बनाया जाता रहा. सच में दीदी आप तो मेरी जिंदगी के रेगिस्तान में मरुस्थल की तरह हो. जीजा जी (दीपक) का लंड मैं अपनी चूत में ले चुकी हूँ, वो आपकी चूत को बहुत खुश रखेंगे.. इतना मैं जानती हूँ.

मैंने बस मुस्कुराती रही.

फिर वो बोली- मगर दीदी कभी दिल में यह ख़याल ना लाना कि मैं अभी भी उन पर नज़र रखती हूँ. वो तो खुद ही मुझे बोल कर मुझसे कह गए थे कि तुम हमेशा के लिए भूल जाना कि कभी मैंने तुम्हें चोदा था, इसी में तुम्हारी और मेरी भलाई है. उन्होंने कहा था कि मुझे नहीं पता कि मैं खुद को कभी माफ़ कर पाऊंगा या नहीं.. मैं पूनम की नज़रों में पूरी तरह से गिर चुका हूँ.. वो मेरे जीजा की बहन भी है.

अब पिंकी मेरे घर से अपने घर मतलब की ससुराल जा चुकी थी और मेरा घर मुझे भूत का डेरा लगता था. इसलिए मैंने दीपक से कहा कि वो भी मेरे पास आ जाए. आख़िर रहना तो दोनों को साथ साथ ही है.. तो फिर क्यों ना अभी से रहना शुरू कर दें.

दीपक को यह सुन कर तो जैसे मुँह माँगी मुराद मिल गई. उसने कहा- मैं तो अपनी मलिका की सेवा में ही रहना चाहता हूँ. मगर मैं अलग कमरे में नहीं रहूँगा. मैं वहीं पर सोया करूँगा, जहाँ तुम सोया करोगी.
मैंने उसकी आँखों में अपनी आंखें डालते हुआ कहा- बहुत शैतान हो गए हो.
वो बोला- अगर साथ तुम जैसी का मिलेगा तो शैतान नहीं तो और क्या बन सकता हूँ.

उसी रात को दीपक अपना सामान लेकर मेरे घर पर आ गया और बोला- अब यहाँ से तो मैं निकलने वाला हूँ नहीं. हां अगर कभी पता लगा कि जीजा जी आने वाले हैं.. तो मैं तब तक के लिए किसी होटल में चला जाऊंगा, जब तक वो यहाँ रहेंगे.
मैंने कहा- इसकी नौबत नहीं आएगी. उससे पहले ही भैया तुम्हारा और मेरा हाथ एक दूसरे को दे देंगे.

सोने से पहले वो मुझसे बोला कि अपनी पूरी सफाई कर लो ना.
उसे नहीं पता था कि मैंने उसके आने से पहले ही चुत चिकनी कर रखी थी. मैंने इठला कर कहा- मुझे तंग ना किया करो. मेरा दिल नहीं है.. अगर तुमको सफाई करनी तो कर लो.. अपनी भी और मेरी भी.

उसने तो अपनी झांटें साफ़ कर रखी थीं मगर उसे पता नहीं था.. इसलिए वो शेविंग क्रीम और रेज़र ले कर आया और मेरी चूत की शेव करने के लिए जब मेरी चड्डी नीचे की, तो उसे महकी हुई सेंट की महक मिलने लगी. वो साफ़ चूत देख कर हैरान हो गया कि मैंने उसके कहे बिना ही चुत साफ करके रखी हुई थी.

उसने कहा- मतलब कि तैयारी पूरी की हुई है.. और बोल मुझसे रही हो कि मैं शैतानी करता हूँ.
यह कहते हुए वो मेरी चूत पर अपना मुँह मारने लगा. मैंने भी चुत पसार दी और मजे से चुत चटाई का मजा लेने लगी. उसने चूत को चाट चाट कर बुरा हाल कर दिया. तभी मेरी चूत का फुव्वारा चल पड़ा, जिसको वो पूरी तरह से पी गया. अब यह काम रोज़ का ही हो गया था. मैंने सोचा कि किसी भी लंड पर विश्वास करना बेवकूफी ही होगी, इसलिए मैंने उससे कहा- जब तक भैया कोई तारीख निश्चित नहीं करते, हम लोग कोर्ट मैरिज कर लेते हैं.. ताकि हमारा एक दूसरे के साथ रहना पूरी तरह से क़ानूनन एक पति पत्नी का रिश्ता हो जाए.

उसको भी यह बात जंच गई और हम ने अगले सप्ताह ही कोर्ट मैरिज के पेपर जमा करा दिए. इस तरह से क़ानून की नज़रों में हमारी भी शादी हो गई. मगर भाई भाभी को अभी कुछ पता नहीं था. उन्होंने हमारी शादी का दिन फिक्स करके हमें कहा कि हम लोग ऑस्ट्रेलिया ही आ जाएं क्योंकि उनके सभी जान पहचान वाले वहीं रहते हैं और फिर मेरी माँ भी भाई के साथ ही हैं.

हमने ऐसा ही किया और इस तरह से अब उनकी नज़रों में भी मैं शादीशुदा हो गई.

जब फर्स्ट नाइट का मिलन हुआ तो मैंने उससे कहा- अब क्या इरादा है.. जो करना था.. वो तो तुम कई बार कर चुके हो. अब करो या ना करो कुछ फर्क नहीं पड़ता.
वो बोला- नहीं जी.. अभी देखो मैं आज तुम्हारी गांड की सील तोड़ता हूँ.
मैं यह सुन कर घबरा गई और बोली- मैंने सुना है कि इसमें बहुत तकलीफ होती है और दर्द कई दिनों तक रहेगा.
उसने कहा- मारो गोली उनको, जिन्होंने ऐसा कहा है, तुम एक बार करवा के देखना.

वो एक क्रीम की ट्यूब अपने साथ रखे हुए था.. जो उसने मेरी गांड को खोल कर डाल दी और कुछ अपने लंड के ऊपर ऊपर लगा ली. फिर मेरी गांड में लंड सैट करके एक जोरदार धक्का मारा, जिससे मेरी चीखें निकलने लगीं.

मैंने कहा- निकालो इस बेरहम को.. तुम किसी और के पास जाओ गांड मारने के लिए.. मुझे कुछ भी नहीं करवाना.

मगर उस पर तो गांड चुदाई का भूत सवार हो गया था, मेरी जान निकल रही थी.

उसने फिर भी कोई तरस नहीं खाया और एक और धक्का दे मारा, जिसका नतीजा हुआ कि उसका लंड आधे से ज़्यादा गांड में घुस गया था. मैं रोने लग गई और उसको गालियां दे रही थी. मगर उसने गालियों को अनसुनी करके एक और धक्का मारा, जिससे उसका पूरा लंड मेरी गांड में अन्दर तक घुस गया.

अब वो लंड को हिलाना चाहता था मगर वो बुरी तरह से फँस गया था. खैर 2-3 मिनट तक रेस्ट करने के बाद वो अन्दर बाहर अपने लंड को करने लगा.

अब दर्द भी कम होने लगा था और मैं कुछ कुछ नॉर्मल होती जा रही थी. दीपक के लंड की शंटिंग चलना शुरू हो गई थी. कुछ देर इसी तरह से धक्के मारने के बाद जब लंड का पानी गांड में गिर गया, तो वो ढीला हो गया.

उसके बाद बोला- अब तुम अपनी चूत को मेरे लंड पर डाल कर चुदना.
मैंने कहा- अभी गांड का दर्द तो ख़त्म होने दो.. फिर सोचूँगी.
खैर उसने अपनी सुहागरात मेरी गांड की सील तोड़ कर मनाई.

अब जिंदगी मज़े में गुजर रही है. मेरे दोनों दरवाजे खुल चुके हैं. जब दिल करता है अगले दरवाजे से लंड ले लेती हूँ.. और जब दिल करता तो पिछले दरवाजे से दीपक का लंड अन्दर आ जाता है.

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