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पतिव्रता बीवी की चुदाई गैर मर्द से करवाने की तमन्ना-6

अब तक आपने मेरी बीवी की चुदाई स्टोरी में पढ़ा था कि मेरी बीवी संजू ने गुप्ता जी के लंड के आगे वाली चमड़ी को पीछे किया, पीछे करते ही एक अजीब सी दुर्गंध पूरे कमरे में फैल गई।
अब आगे..

मैंने देखा कि गुप्ता जी के लंड की चमड़ी के नीचे अर्थात सुपारे के ऊपर कई सालों से चुदाई नहीं करने एवं लंड का सफाई नहीं करने के कारण पूरा सफेद रंग की जमी हुई परत चढ़ गई थी।

मैंने तथा संजना ने अपनी नाक बंद कर ली, लेकिन संजना आँखों पे पट्टी रहने की वजह से ये गंदी परत नहीं देख पाई।
वो बोली- लंड साफ नहीं किए थे क्या?
मैं फिर बगल में जाकर बोला- डार्लिंग ये उस बूढ़े का लंड है.. बेचारा गरीब है साबुन शैम्पू नहीं मिलता है, उस पर दया करो.. सिर्फ इसके लंड को महसूस करो जो कि तुम्हारी चूत फाड़ने के लिए काफी है।

संजना मोटे लंड और चूत फाड़ने की बात सुनकर और ज्यादा गर्म हो गई और गर्म-गर्म सासें छोड़ने लगी।

सच ही कहते हैं लोग कि सेक्स में पूरी तरह से डूब जाने के बाद घृणा नाम का चीज नहीं रह जाती है।

संजना ने आव देखा ना ताव गुप्ता जी के लंड को अपने मुँह के अन्दर ले लिया और चूसने लगी। लंड से अभी भी दुर्गंध आ रही थी, पर संजना को अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था, वो तो गुप्ता जी के लंड को आईसक्रीम की तरह चूसे जा रही थी।

संजू गुप्ता जी के लंड के सुपारे पर जमी सारी सफेद गंदगी को चूस कर अपने मुँह के अन्दर बड़े चाव से चूस रही थी। संजना की धड़कनें धौंकनी की तरह चल रही थीं।

संजना ने गुप्ता जी के लंड को मुँह से निकाला तो देखा गुप्ता जी का लंड पूरा साफ हो गया था। संजना के होंठों पर वो सफेद गंदगी लगी हुई थी। एकाएक गुप्ता जी ने अपना मुँह संजना के होंठों से लगा दिया और उसके मुँह पर सारी गंदगी को खा गए। वे उसे बेतहाशा चूसने लगे या यूं कहिए कि होंठों को खाने लगे।

संजना फिर से गुप्ता जी के लंड को चूसने लगी। वो पूरे जोर से लंड के चूसे जा रही थी। लगभग पांच मिनट लंड चूसने के बाद भी गुप्ता जी का लंड खड़ा नहीं हुआ। मुझे आश्चर्य होने लगा और संजना को भी कुछ लगने लगा था।

मुझे लगा अब बुढ़ापा औकात दिखा रहा है। संजना परेशान हो गई और बोली- क्या हुआ बाबा.. आपका लंड खड़ा क्यों नहीं हो रहा है?
मैं उसके पास जाकर बोला- बेटी (करेक्टर में) बूढ़ा आदमी हूँ.. मुझ पर थोड़ा रहम करो.. मुझे समय लगेगा, मुझे तृप्त कर दो बेटी।

संजना अब अलग अंदाज में जीभ को गुप्ता जी के मूत्र छेद में फिराने लगी तथा उनके टट्टे भी मुँह में लेकर चूसने लगी।

गुप्ता जी ये सब देख रहे थे और वो संजना की चूचियों की घुंडी को भी घुमाते हुए चिकोटी सी काट रहे थे। संजना पूरी निष्ठा से गुप्ता जी के लंड के सुपारे को मुँह में भरकर कभी अन्दर.. कभी बाहर कर रही थी।

लगभग दस मिनट लंड चूसने के बाद मेहनत रंग लाई और गुप्ता जी का लंड खड़ा होने लगा।

संजना खुश हो गई और गुप्ता जी के आंडों को सहलाते हुए लंड को नजाकत से चूसे जा रही थी। धीरे-धीरे गुप्ता जी का लंड बहुत भयंकर रूप से टाईट हो गया और फनफनाने लगा, जैसे कोई लोहे का मोटा सा सरिया हो।

मैंने उस लंड को देखा तो सहम गया… वो लगभग 7.5 इंच से कम नहीं होगा। संजना ने बहुत मोटा और लंबा लंड को महसूस किया जो कि पूरा लोहे की तरह सख्त हो गया था। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि ये वही लंड है जो कुछ देर पहले खड़ा ही नहीं हो रहा था।

अब तक संजना की चूत में फिर से पूरी तरह से पानी भर गया था और वो चुदने के लिए व्याकुल थी।
संजू बोली- ऐ बाबा.. अब मुझे अपने मोटे लंड से चोदिए ना।

गुप्ता तो इसी फिराक में थे, आखिर उनको कई साल बाद चूत चोदने के लिए नसीब हो रही थी, वो भी इतनी कमसिन चूत।

गुप्ता जी ने संजना को पलंग पे लिटा दिया और उसकी दोनों टांगों को फैला कर संजना की चूत को अपने मुँह से थोड़ा चूसा, जो पहले से ही पानी बहा रही थी।

संजना अब पूरी तरह से बेकाबू थी और वो बार-बार चोदने के लिए मिन्नतें कर रही थी- आह.. बाबा चोदिए ना.. अपने मोटे लंड से.. अब जल्दी से पेल दो प्लीज़ बाबा..

गुप्ता जी ने संजना की चूत में अपना थूक दो-तीन बार थूका, जिससे संजू की चूत थूक से चिपचिपी हो गई।

अब गुप्ता जी अपने लंड का सुपारा संजना की चूत में घुसाने लगे। थूक की चिपचिपाहट एवं चूत के पानी से गुप्ता जी का मूसल लंड संजू की कोमल चूत को चीरते हुए अन्दर घुसने लगा।
संजना ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊई.. ई.. उई.. इस्स.. आह…’ करते हुए सीत्कार भरने लगी।

मैं तो जैसे अपनी फैन्टेसी साकार होते देख कर पागल हुआ जा रहा था।

कुछ ही पलों में गुप्ता जी का पूरा का पूरा लंड संजना की चूत में प्रवेश कर चुका था। संजना को अपनी चूत में इतना जबरदस्त भराव पहली बार महसूस हुआ। उसे सुहागरात की तरह मजा आ रहा था।

गुप्ता जी अब लंड को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगे। संजना के मुँह से निकलती ‘आह.. उई.. हाँ.. ईस्स.. अअह.. हम्म..’ की आवाजों से पूरा कमरा गूँजने लगा। गुप्ता जी अपने लंड को पूरा बाहर निकाल कर उसे बार-बार संजू की चूत में पेले जा रहे थे। गुप्ता जी का लंड जब भी बाहर निकल कर दोबारा संजू की चूत में घुसता था.. तो चूत से घप-घप की आवाज आती थीं।

इस बीच मेरा भी लंड फिर से खड़ा हो गया था। दस मिनट इस पोज में चोदने के बाद गुप्ता जी संजना को डॉगी स्टाईल में ले आए और उसकी चूत में पीछे से अपना मूसल लंड घुसा दिया। लंड घुसते ही संजना के मुँह से एकदम से ‘उई.. माँ.. ईस्स…’ की आवाज निकली।

इस समय डॉगी बनी संजू की गांड विशालकाय लग रही थी।

गुप्ता जी अब मेरी बीवी को इस पोज में धीरे-धीरे चोदने लगे, इसमें संजना को पूरा मजा आने लगा और वो गुप्ता जी को यानि कि करेक्टर में बाबा को शाबाशी दे रही थी। गुप्ता जी का मूसल लंड संजू की चूत में जाते समय संजू की https://www.antarvasnax.com/maa-beta/maa-ki-gand-ka-diwana/गांड का छेद तक बंद और खुल रहा था।
वो गुप्ता जी को शाबाशी देते हुए बोली- हाँ बाबा ऐसे ही इस्सस.. आह.. उई.. चोदो.. मजा आ रहा है।

गुप्ता जी इस पोज में 5 मिनट तक संजू को चोदने के बाद उसकी कमर को कस कर पकड़ लिया और पूरे वेग से चूत को चोदने लगे। बमपिलाट धक्के लगने से संजू की चीखें निकलने लगीं।

वो ‘हम्म.. उम्म.. आह.. आहा.. सी…सी..’ करने लगी। लंड का वेग इतना तेज था कि मेरी बीवी की गांड गुप्ता जी के पेड़ू से सटते हुए पूरी छितरा जा रही थी और संजू की चूचियां पूरे वेग से हिचकोले खा रही थीं।
वो दृश्य बड़ा ही कामुक था।

संजू रिरयाते हुए बोली- आह.. बाबा अब बस कीजिए ना!

अब गुप्ता जी ने लंड को बाहर निकाला, उनके लंड पर संजू की चूत का पानी की सफेद परत चढ़ी हुई थी। ऐसा लग रहा था कि बड़ा वाला बेलन दही के कटोरे से बाहर निकाला हुआ हो।

अब गुप्ता जी खुद पीठ के बल लेट गए और संजू को अपने ऊपर ले लिया। चुदाई की कमान अब संजू के हाथ में थी। संजना में भी न जाने इतनी ताकत कैसे आ गई.. वो भी पूरे जोर से लंड पर उठक-बैठक कर रही थी, जिससे कि उसकी चूचियां और गांड पूरी कामुकता से हिल रही थी।
कमरे में चुदाई की ‘फच.. फच.. फचाक.. घप…घप.. चटाक चटाक..’ की आवाज गूँज रही थीं।
संजू जैसे जन्नत में गोता खा रही थी। वो इस पोज में संजू लगभग 10 मिनट चुदी।

अब वो थोड़ा थक गई थी तो वो बोली- बाबा अब मैं नीचे आऊंगी, आप मेरे ऊपर आकर चुदाई करो।
इसके बाद संजना नीचे आ गई और गुप्ता जी उसके ऊपर लेट गए और जबरदस्त चुदाई करने लगे।

चुदाई इतनी जबरदस्त थी कि मेरा पलंग भयंकर आवाज करने लगा। गुप्ता जी को निकला हुआ पेट संजना के पेट से टकरा रहा था.. लेकिन संजना को चुदाई में इसका जरा सा भी भनक नहीं लगी।

चुदाई से संजू के मुँह से लगातार कामुकता भरे स्वर में आवाज आ रही थी- आह.. उह…उई.. ई.. इस्स.. आह..

अब तक कई मिनट की लगातार चुदाई हो चुकी थी, पर गुप्ता जी का पानी तो निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरा भी अब तक दूसरा बार माल निकल गया था। संजू अब झड़ने के कगार पर थी, सो वो बोली- और जोर से चोदिए।

गुप्ता जी पूरी शक्ति से संजना को चोदे जा रहे थे। संजना का पूरा शरीर कांपने लगा और वो फिर से अकड़ी और झड़ते-झड़ते निढाल हो गई।
पर गुप्ता जी संजना को चोदे ही जा रहे थे।

काफी देर की चुदाई हो चुकी थी। अब संजू में सहने की शक्ति नहीं रह गई थी। वो कराह कर बोली- अब छोड़ दीजिए ना, अब नहीं सह पाऊंगी बाबा।
पर गुप्ता जी का पानी अभी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था, वो भी परेशान थे।

फिर गुप्ता जी ने संजना को आराम देने की नीयत से करवट में लिटा दिया और उसके पीछे खुद करवट लेकर लेट गए। गुप्ता जी का लंड अभी भी उसी लंबाई मोटाई और पूरा टाईट था। वो मेरी तरफ देख कर आंखों से इशारे से बोले कि क्या करूँ.. माल निकल ही नहीं रहा है।

मैंने भी उनकी हालत पर तरस खाते हुए उन्हें इशारा किया कि ठीक है कुछ समय लेकर निकाल लीजिए।

गुप्ता जी अब संजू को करवट में ही उसकी चूत में अपना लंड डालकर चोदने लगे, संजू कराहने लगी। उसकी चूत सूज सी गई थी।
गुप्ता जी चुत पर लंड की चोट पे चोट दिए जा रहे थे और संजू बेचारी कराह के सह रही थी। आखिर वो दो बार झड़ चुकी थी, उसका जवानी का पूरा रस गुप्ता जी नीम्बू की तरह निचोड़ चुके थे।

संजू में अब शक्ति नहीं बची थी। लगातार चुदाई की इन्तहा हो चुकी थी और गुप्ता जी थे कि झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
इसी बीच संजू निढाल होकर बेहोश सी हो गई थी।

मैंने गुप्ता जी को इशारे से कहा कि जल्दी लंड निकालिए।
गुप्ता जी ने अपना लंड संजू की सूजी हुई चूत से निकाला जो कि अब भी वैसे ही फनफना रहा था।

फिर संजना जो बेहोश थी, उसको पीठ के बल लिटाया और उसकी गांड के नीचे दो तकिया लगा कर अपना लंड संजना के चूत में फिर से पेल दिया। इस बार गुप्ता जी इतनी जोर से चुदाई कर रहे थे कि संजना बेहोशी से जाग गई और कराहने लगी।

गुप्ता जी के इस पोज में पूरा लंड संजू के बच्चेदानी में चोट कर रहा था।

देर तक चुदाई के बाद मुझे गुप्ता जी लगे कि झड़ने वाले हैं। मैंने उन्हें चूत के अन्दर नहीं झड़ने हेतु इशारा करना चाहा पर वो इस आखिरी समय में आंख मूंदे हुए थे और मैं जोर से कह भी नहीं सकता था।

वास्तव में हम और संजना परिवार नियोजन कर रहे थे और मैं अपना माल हमेशा बाहर ही निकालता था। खास कर मेन्सिस के जस्ट बाद तो गर्भधारण का चान्स काफी ज्यादा होता है, इसलिए इस समय तो किसी भी हालत में चूत के अन्दर माल नहीं छोड़ता था।
लेकिन अब किया क्या जा सकता था, संजू भी इस हाल में नहीं थी कि वो माल निकलने से रोक पाती।

फिर वही हुआ, गुप्ता जी पूरे वेग से अपने लंड को संजू की चूत के अन्दर जड़ तक पेलते हुए बेतहाशा झड़ने लगे। लगभग दो मिनट के बाद वो संजना के ऊपर से हटे।

मैंने देखा संजू की चूत में गुप्ता जी का पूरा वीर्य भर गया था जो काफी गाढ़ा और बहुत मात्रा में था। गुप्ता जी का रस पूरा बच्चेदानी तक भरकर चूत के मुँह तक आ गया था। संजू इस हालत में थी भी नहीं कि वो चूत से वीर्य को निकाल सके सो अधिकांशतः वीर्य संजू के गर्भाशय में प्रवेश कर डिंबाणु से मिल गया था।

अर्थात गुप्ता जी का वीर्य का अंश मेरी बीवी के पेट में चला गया था। संजू की चूत पूरी तरह से सूज गई थी और कुछ खून भी आ गया था।

गुप्ता जी उठे ओर मुझे चुपके से गले लगाकर चले गए। मैं अपनी बीवी की चूत में लबालब भरे वीर्य को देखे जा रहा था। अचानक संजना बोली- क्या मैं आंख से पट्टी हटा लूँ बाबा।

मैंने खुद उसके आंख से पट्टी हटा दी। उसकी आँखें थक चुकी थीं और पूरा बदन सुस्त पड़ चुका था, परंतु वो पूरी तरह से संतुष्ट लग रही थी और मुझे प्यार से देख कर बोली- जय आज तो आपने मुझे पूरा निचोड़ कर रख दिया।

फिर संजू अपनी चूत को देखने लगी जिसमें गुप्ता जी का वीर्य बह रहा था।

गुप्ता जी के वीर्य का रंग हल्का पीलापन लिये हुए कुछ अलग सा था और पूरा गाढ़ा था.. उसमें से एक अजीब दुर्गंध आ रही थी।
संजू ने अचानक उसी अवस्था में पूछा- आपका वीर्य आज इतना ज्यादा और गाढ़ा कैसे हो गया जान?

यह कह कर उसने अपनी चूत के पास अपनी हाथ ले जाकर अपनी बीच के तीन उंगलियों से चूत के अन्दर करके वीर्य निकाला, जो कि उसकी हथेली पर किसी मक्खन की तरह दिख रहा था।

मुझे लगा कि ये संजना क्या कर रही है। एकाएक मुझे आश्चर्य लगा कि संजू बड़े ही प्यार से मेरी ओर देखते हुए वो पूरा उंगली को अपने मुँह में डालकर खा गई। फिर मुझे अपने पास बुलाकर मुझे अपने होंठों से चूमने लगी। उसके मुँह से बड़ी बदबू आ रही थी, जो कि गुप्ता जी के गंदे लंड और वीर्य के मिले-जुले असर के कारण था।

फिर उसी अवस्था में संजू और मैं सो गए।

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